बागेश्वर। धूराफाट पंपिंग पेयजल योजना के पंप हाउस के भवन बदहाल हालत में हैं। नंदीगांव पंप हाउस का भवन जर्जर हो गया है। पंप ऑपरेटर के लिए स्टाफ रूम की सुविधा न होने उन्हें खतरा उठाकर ड्यूटी करनी पड़ती है। अन्य पंप हाउसों के भवनों को भी मरम्मत की दरकार है।
कठपुड़ियाछीना क्षेत्र के 12 ग्राम पंचायतों को पीने का पानी दिलाने वाली धूराफाट पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण वर्ष 2006 में हुआ था। सरयू नदी से क्षेत्र के गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए साजेश्वर, तिलानी, नंदीगांव में तीन पंप गृह बने हैं। इन पंपों के माध्यम से पानी बौड़ी गांव में बने मुख्य टैंक में पहुंचता है जहां से पूरे क्षेत्र को पानी की आपूर्ति की जाती है। क्षेत्र की पूरी पेयजल योजना इन पंप हाउस पर निर्भर है। इसके बावजूद निर्माण के बाद से इनकी सुुध नहीं ली गई। हालात यह हैं कि पंप हाउस के भवन जर्जर हो गए हैं। मशीनरी पुरानी होने से आए दिन खराबी आ रही है।
नंदीगांव में बने पंप हाउस में स्टाफ रूम तक नहीं बना है। यहां तीन पंप ऑपरेटर तैनात हैं। ऑपरेटर को मशीन के पास ही बैठकर ड्यूटी देनी पड़ती है। दिन की ड्यूटी तो ऑपरेटर किसी तरह से कर लेते हैं लेकिन रात के समय ड्यूटी के दौरान खतरा बना रहता है। भवन में खिड़की, दरवाजे नहीं हैं। गर्मी में सांप समेत कई जानवर पंप हाउस में घुस आते हैं। सर्दियों में तेज हवा के थपेड़ों का सामना करना पड़ता है। कई बार मशीनों से नट, बोल्ट छिटक जाते हैं। ऐसे में पंप के पास बैठकर ड्यूटी देेने वाले कर्मचारी के लिए खतना बढ़ जाता है।
कई बार कर चुके हैं फरियाद
बागेश्वर। कठपुड़ियाछीना जन संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत बताते हैं कि पंप गृह की बदहाली को कई बार विभाग और डीएम के सम्मुख उठा चुके हैं। इसके बावजूद समस्या नहीं सुलझी है। जर्जर भवन और मशीनरी के कारण पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है। जल्द पंप गृहों की व्यवस्थाओं को बेहतर करने की सुध नहीं ली गई तो आने वाले समय में पेयजल व्यवस्था चरमरा सकती है।
जल संस्थान समय-समय पर मशीनों का निरीक्षण कर कमियों को दूर करता है। पेयजल निगम ने जल जीवन मिशन के तहत पहले चरण में धूराफाट क्षेत्र में कनेक्शन दिए हैं। दूसरे चरण में विभाग को पंप गृहों की मरम्मत के कार्य भी कराने को कई बार कहा गया है। उम्मीद है जल्द पंप संचालकों की समस्याओं का निदान हो जाएगा। - सीएस देवड़ी, ईई, जल संस्थान, बागेश्वर।