बागेश्वर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान पीठ नई दिल्ली के सदस्य और न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनजीटी के आदेशों का अनुपालन, जिले की जिला पर्यावरण योजना के क्रियान्वयन और अब तक की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।
बृहस्पतिवार को कौसानी में आयोजित बैठक में जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. सुमित राय ने जिला पर्यावरण योजना पर और नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारी विवेक परिहार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। डीएफओ आदित्य रत्न ने बताया कि विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर को प्लास्टिक व कचरा मुक्त करने के लिए एफडीआर जमा करने की अनूठी व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा घर-घर कूड़ा संग्रहण, स्रोत स्तर पर ही गीले-सूखे कचरे का पृथक्करण, शिकायत निवारण के लिए क्यूआर कोड प्रणाली और जनसहभागिता बढ़ाने के प्रयासों की भी जानकारी दी। प्रस्तुतियों और चर्चाओं का संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि अपशिष्ट का समुचित पृथक्करण और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो वही कचरा ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। इससे पर्यावरण साफ रहेगा, अपशिष्ट संग्रहण और रीसाइक्लिंग से जुड़े स्थानीय लोगों के लिए आजीविका और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने नगर पालिका ईओ से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की वर्तमान व्यवस्था, भूमि की उपलब्धता, लिगेसी वेस्ट, सीवेज और ई-वेस्ट प्रबंधन की विस्तृत जानकारी ली। जज अहमद ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की पहचान और किसी भी दशा में कोई ठोस अपशिष्ट या सीवेज का गंदा पानी इनमें प्रवाहित न होने देने के निर्देश दिए। कहा कि हिमालय और हमारे वन क्षेत्र जल के मुख्य स्रोत हैं, इनके संरक्षण के लिए सभी विभागों को एक टीम की तरह मिलकर काम करना होगा। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों ने राज्य अतिथि गृह कौसानी परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर एडीएम एनएस नबियाल, एसडीएम वैभव कांडपाल आदि मौजूद रहे।