बागेश्वर। नई तकनीक की मशीनों के अभाव, शिक्षकों की कमी और प्रशिक्षण उपरांत नौकरी नहीं मिलने के कारण आईटीआई करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या हर साल घट रही है। आईटीआई का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी कई युवाओं को अच्छी नौकरी नहीं मिल पाना भी इसकी एक वजह मानी जा रही है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कांडा में इस साल केवल 22 युवाओं ने दाखिला लिया है।
नवंबर में आईटीआई कांडा में प्रवेश के लिए काउंसलिंग शुरू हुई थी। चार चरणों में संपन्न हुई काउंसलिंग के बाद 22 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। इसमें इलैक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए 18 और स्टेनों हिंदी में मात्र चार छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है। जबकि इससे पहले सत्र में प्रवेश लेने के बाद 20 प्रशिक्षणार्थी बीच में ही आईटीआई छोड़कर चले गए। आईटीआई कांडा के प्रधानाचार्य कवींद्र सिंह कन्याल ने बताया कि इस साल आईटीआई करने वालों की संख्या घटी है। पिछले सत्र में 45 ने प्रवेश लिया था। जिले में पांच औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हैं। राज्य सरकार की ओर से संचालित आईटीआई गरुड़, नाकुरी, कठपुड़ियाछीना साल 2019 से बंद पड़े हैं। कपकोट और कांडा में आईटीआई की कक्षाएं चल रही हैं।