कठायतबाड़ा में पानी बांटता जलकर्मी
पेयजल समस्या गहराने के बाद जल संस्थान ने वैकल्पिक आपूर्ति के जरिये समस्याग्रस्त क्षेत्रवासियों के हलक तर करने की योजना बनाई है। इसके तहत किराए पर दो टैंकर लिए हैं। संस्थान विभागीय और किराए के टैंकरों से समस्याग्रस्त क्षेत्रों में आपूर्ति करेगा।
नगरीय क्षेत्र में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 135 लीटर पानी के मानक के हिसाब से लगभग 34 हजार की आबादी को 4.54 एमएलडी पानी की दरकार है। लेकिन जल संस्थान की सात योजनाओं के जरिये महज 2.77 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। सीधे तौर पर 1.77 एमएलडी पानी की रोज कमी बनी है।
मांग और आपूर्ति के अंतर के बीच संस्थान रोस्टर के हिसाब से पानी बांट रहा है। ऐसे में बड़ी आबादी को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। क्षेत्रवासियों को प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है। पेयजल समस्या को देखते हुए संस्थान ने टैंकरों के जरिये वैकल्पिक आपूर्ति की तात्कालिक योजना तैयार की थी। इसके तहत अब किराए पर दो टैंकर लिए गए हैं। जल संस्थान के ईई नंद किशोर ने बताया कि समस्याग्रस्त क्षेत्रों में टैंकरों के जरिये वैकल्पिक आपूर्ति की जाएगी। हालांकि मांग और आपूर्ति के भारी अंतर को देखते हुए संस्थान की यह कोशिश नाकाफी है।
मंडलेसरा और कठायतबाड़ा में बांटा पानी
बागेश्वर। मंडलसेरा और कठायतबाड़ा पेयजल समस्या के लिहाज से सर्वाधिक समस्याग्रस्त क्षेत्र हैं। मंडलसेरा पेयजल योजना के स्रोत का डिस्चार्ज घटने के बाद समस्या गहराई है। क्षेत्र की साढ़े सात हजार की आबादी को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। वो भी नाकाफी साबित हो रहा है। बृहस्पतिवार को भी क्षेत्रवासियों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ा। वहीं, कठायतबाड़ा में भी लोग पानी के लिए परेशान रहे। जल संस्थान ने टैंकरों के जरिये समस्याग्रस्त क्षेत्रों में पानी बांटा। टैंकरों से पानी लेने के लिए क्षेत्रवासियों में होड़ मची रही।
मवेशियों के हलक भी सूखे
बागेश्वर। मंडलसेरा में पेयजल की किल्लत से इंसान ही नहीं, मवेशी भी हलकान हैं। मवेशियों को पानी पिलाना तो दूर, खुद के लिए पानी का बंदोबस्त मुश्किल हो रहा है। ऐसे में मवेशी प्यासे हलक भटक रहे हैं। बृहस्पतिवार को बाइपास के पास एक प्यासी गाय हैंडपंप के चक्कर काट रही थी। मवेशी की समस्या भांप कर राहगीर गोपाल सिंह बिष्ट ने हैंडपंप चलाया। इसके बाद मवेशी ने प्यास बुझाई।