सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू हो चुका है। यह अधिनियम स्वतंत्रता के बाद पारित सर्वाधिक महत्वपूर्ण कानून है। इस अधिनियम के तहत जनता को एक बहुत महत्वपूर्ण अधिकार दिया गया है। सशक्त लोकतंत्र तथा विकास के लिए सूचना के अधिकार के प्रयोग को प्राथमिकता देनी होगी। यह बात अपर जिलाधिकारी एसएस जंगपांगी ने सूचना का अधिकार प्रशिक्षण कार्यशाला में लोक सूचना अधिकारियों से कही।
जिला सभागार में अपर जिलाधिकारी जंगपांगी ने कहा कि आवेदक द्वारा मांगी गई किसी भी सूचना को नियत समयावधि के अंतर्गत आवेदक को उपलब्ध कराने का दायित्व एवं सूचना न देने के कारण को साबित करने की जिम्मेदारी हर विभाग के लोक सूचना अधिकारी की है। सरकारी कामकाज से संबंधित सूचनाएं देने के लिए सरकारी कर्मचारी को सतर्क होकर काम करना होगा। आवेदनकर्ता को 30 दिन के भीतर सूचना अनिवार्य रूप से दी जाए, नियत समय सीमा के भीतर सूचना न देने पर विभागीय अपीलीय अधिकारी को यदि आवेदनकर्ता अपील करता है तो उसके प्रति भी लोक सूचना अधिकारी को निगरानी रखनी होगी। लोक सूचना अधिकारी का कार्य नागरिकों के सूचना अनुरोध पत्रों का अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार निस्तारण करना है।
अधिकारी नागरिकों को इस अधिनियम के अंतर्गत सूचना प्राप्ति के लिए समुचित सहायता प्रदान करने के लिए भी उत्तरदायी होगा। जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर जन शिक्षण संस्थान के परियोजना प्रबंधक डॉ. जितेंद्र तिवारी ने स्लाइड शो के माध्यम से कई जानकारियां दी। वहां उप जिलाधिकारी कांडा रिंकू बिष्ट, डीडीओ केएन तिवारी, डीपीआरओ पूनम पाठक, मुख्य कृषि अधिकारी विजय प्रकाश मौर्य, डीएसओ जसवंत सिंह कंडारी, खंड विकास अधिकारी बागेश्वर, कपकोट, गरुड़ समेत सभी विभागों के लोक सूचना अधिकारी उपस्थित थे।