बागेश्वर। गर्भावस्था के पांच महीने के बाद लेवल टू जांच करानी जरूरी है। इस जांच से गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति का पता चलता है लेकिन सभी गर्भवती महिलाएं इस जांच के प्रति संवेदनशील नहीं रहती हैं।
लेवल टू जांच को लेकर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में जागरूकता की कमी है। नगरीय क्षेत्रों की महिलाएं जहां लेवल टू जांच कराने अस्पताल आ रही हैं वहीं ग्रामीण इलाकों से इक्का-दुक्का ही जांच करवाने अस्पताल आती हैं।
जिला अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रीमा उपाध्याय ने बताया कि लेवल टू जांच में आधे से एक घंटे का समय लगता है। इसमें गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति जांची जाती है। जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाएं जिनका अतीत में असामान्य शिशु जन्मा हो और 30 से अधिक उम्र में गर्भ धारण करने वाली महिलाओं को अनिवार्य रूप से लेवल टू जांच की जांच करानी चाहिए।
एक रेडियोलॉजिस्ट होने से आती है दिक्कत
बागेश्वर। बागेश्वर जिला अस्पताल में दो के स्थान पर एक ही रेडियोलॉजिस्ट होने से भी दिक्कत आती है। लेबल टू जांच में समय लगता है। यह भी लेबल टूट जांच में कमी का कारण है।
क्या है लेवल टू जांच
बागेश्वर। लेवल टू जांच (फैटल एनाटॉमी सर्वे) में अल्ट्रासाउंड के माध्यम से बच्चे के हृदय, मस्तिष्क, रीढ़ और अन्य प्रणालियों की जांच की जाती है। गर्भावस्था के पांचवें महीने में यह जांच की जाती है। संवाद