ग्रामीणों द्वारा बनाया गया लकड़ी का पुल।
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जिले के लाहुर गांव तक जाने के लिए सड़क तो दूर सुरक्षित पैदल मार्ग तक नहीं सुधर सका है। वहां रहने वाले करीब डेढ़ सौ परिवार हर साल बरसात में जान हथेली में रखकर लौगड़िया गधेरा पार करने को मजबूर हैं। गधेरे में स्वीकृत पुल मंजूरी के 10 साल बाद भी नहीं बन सका है।
लाहुरगांव में 145 परिवार रहते हैं। गांव के लिए सड़क नहीं बन पाई है। यहां के लोग पैदल ही लगभग छह किमी की पैदल दूरी तय कर गांव तक पहुंचते हैं। लाहुरगांव को जाने वाले मार्ग में लौगड़िया गधेरा है। यह गधेरा बरसात में उफान पर आता है। ग्रामीणों की मांग पर 10 साल पूर्व पुल की स्वीकृति मिली थी, लेकिन यह पुल नहीं बन पाया है। ग्रामीण इस गधेरे में अपने प्रयासों से लकड़ी का पुल बनाते हैं। लकड़ी के लट्ठों के सड़-गल जाने पर फिर से पुल बनाना पड़ता है।
गांव के लोगों के साथ ही स्कूली बच्चे भी इसी पुल से आवाजाही करते हैं। गधेरे के उफान पर रहने से इस कच्चे पुल से आवाजाही में खतरा बना रहता है। ग्रामीण खीम सिंह, पोखर सिंह, आलम सिंह, गोविंद सिंह आदि ग्रामीणों ने बताया कि लगातार मांग उठाने के बाद भी पुल का निर्माण नहीं किया जा रहा है। शीघ्र ही यह समस्या डीएम के सामने रखी जाएगी।