पुस्तक मेले में किताबें खरीदती छात्राएं
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बागेश्वर। जिले के नवसृजित तहसीलों में एक अदद भी पुस्तकालय नहीं खुल सके हैं। पुस्तकालय नहीं होने के कारण बच्चों को नामीगिरामी लेखकों और कवियों की रचनाएं पढ़ने को नहीं मिल पा रही हैं। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शासन प्रशासन से नवसृजित तहसीलों में शीघ्र पुस्तकालयों की स्थापना करने की मांग की है।
अलग उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद आई सरकारों ने राज्य में विकास के बड़े-बड़े दावे किए। लेकिन सच तो यह है कि यहां नव सृजित तहसीलों में कपकोट, दुग नाकुरी, कांडा, गरुड़ और काफलीगैर में आज तक तहसील स्तरीय पुस्तकालय की स्थापना नहीं हो सकी है। पुस्तकालय नहीं होने के कारण बच्चों को नामीगिरामी लेखकों और कवियों की रचनाएं पढ़ने को नहीं मिल पा रही हैं।
हालांकि जिला मुख्यालय पर शिक्षा विभाग की ओर से डिस्ट्रिक लाइब्रेरी है तो सही लेकिन तहसीलों से जिला पुस्तकालय की दूूरी 15 से 60 किमी की दूरी होनेेेे के कारण वहां हर किसी का जा पाना संभव नहीं है। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदेश शासन से नवसृजित तहसीलों में शीघ्र पुस्तकालयों की स्थापना करने की मांग की है।
मांग करने वालों में राज्य आंदोलनकारी कल्याण संगठन के अध्यक्ष पूरन पाठक, टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष नीमा दफौटी, जन चेतना मंच कपकोट के अध्यक्ष गोविंद गोरिला, मल्ला दानपुर विकास समिति के अध्यक्ष स्वरूप सिंह कर्म्याल, चौड़ास्थल को अलग ब्लाक बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष विक्रम दानू, कठपुड़ियाछीना को अलग ब्लाक बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र रावत आदि शामिल हैं। इधर, बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास ने बताया कि वह इस मामले में शासन से बात करेंगे।