बागेश्वर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं। हालांकि कुछ समय पूर्व अस्पताल में कुछ बांडधारी चिकित्सकों की तैनाती हुई, लेकिन विशेषज्ञों के पद नहीं भरे जा सके हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में लोगों को स्वास्थ्य केंद्र कांडा में इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस कारण अधिकतर लोग लंबे समय से जिला अस्पताल में उपचार कराने के लिए आते हैं।
चुनाव से पहले नेताओं ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के वादे तो किए, लेकिन हालात अब भी नहीं सुधरे। सीएचसी कांडा में 10 बेड की क्षमता है।
इसके बावजूद अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, सर्जन, निश्चेतक, महिला चिकित्साधिकारी के पद खाली हैं। इन पर नियुक्ति होने की तिथि पता नहीं है।
अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बाल रोग विशेषज्ञ, ऑपरेशन के लिए निश्चेतक, महिला चिकित्सक, फिजिशियन, सर्जन न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीएचसी कांडा में हाल में बांडधारी चिकित्सकों की नियुक्ति हुई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय को सूचित किया गया है।
- डॉ. बीडी जोशी, सीएमओ, बागेश्वर।
भवन है पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं
धौलछीना (अल्मोड़ा)। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। सीएचसी धौलछीना नाम मात्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। यहां न तो डॉक्टरों के पद सृजित हुए हैं, और न ही मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल पा रही हैं।
करीब 16 साल पहले जिला मुख्यालय से 34 किमी दूर पीएचसी धौलछीना को सीएचसी के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू हुई। भवन भी तैयार हो गया लेकिन पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में अब भी लोग जिला अस्पताल पर ही निर्भर हैं।
स्वास्थ्य केंद्र पर भैंसियाछाना विकासखंड की करीब 32 हजार आबादी के अलावा पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के सीमांत गांवों के ग्रामीण भी निर्भर हैं। इसके बावजूद यहां डॉक्टरों की भारी कमी है।
वर्तमान में अस्पताल मात्र दो डॉक्टरों और एक फार्मासिस्ट के हवाले है। एक-एक स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वॉय संविदा पर तैनात हैं। स्वच्छक और चौकीदार का पद लंबे समय से रिक्त है।
चहारदीवारी न होने से अस्पताल की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है और अस्पताल लावारिस पशुओं का अड्डा बन गया है। मुख्य सड़क से अस्पताल को जोड़ने वाला मार्ग बदहाल स्थिति में है। ग्रामीण कई बार अस्पताल के सुधारीकरण की मांग कर चुके हैं। लेकिन अब तक मांग ठंडे बस्ते पर है।