जिले के गिने-चुने प्राइवेट स्कूलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जबकि सरकारी स्कूलों का तो कोई सुधलेवा ही नहीं है। अधिकांश सरकारी स्कूल सुनसान स्थान पर बने हैं। इन स्कूलों में चहारदीवारी तक नहीं है। बागेश्वर जिले में प्राथमिक से लेकर इंटरमीडिएट तक कुल 801 सरकारी स्कूल हैं। इनमें 56 इंटरमीडिएट, 33 हाइस्कूल, 118 जूनियर और 594 प्राथमिक विद्यालय हैं। जबकि प्राइवेट स्कूलों की संख्या लगभग 100 है।
शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बावजूद अधिकांश स्कूलों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। जिले के कंट्रीवाइड पब्लिक स्कूल सहित एक-दो स्कूलों के अलावा अन्य स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। अधिकांश प्राइवेट स्कूलों में चहारदीवारी ही नहीं है। बच्चों को लाने-ले जाने के लिए बस या अन्य वाहनों पर पूरी जिम्मेदारी चालक व कंडक्टर की है। बसों में बच्चों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। सरकारी स्कूलों की हालत और भी खराब है।
जनपद में अधिकांश सरकारी स्कूल आबादी से दूर सुनसान स्थान पर बने हैं। चिंतनीय बात यह है कि इन स्कूूलों में चहारदीवारी तक नहीं है। ऐसे में यदि किसी बच्चे के साथ अप्रिय वारदात होती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा यह एक गंभीर सवाल है।
एक सप्ताह के भीतर सभी प्राइवेट स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक की जाएगी। बैठक में विद्यालयों के सुरक्षा प्रबंध पर चर्चा की जाएगी। किस विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं इसकी भी जानकारी ली जाएगी। सभी विद्यालयों के प्रबंधन को मानकों का पालन करने के निर्देश दिए जाएंगे।
-आकाश सारस्वत
डीईओ, बेसिक बागेश्वर।