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विभाग ने नहीं सुनी तो स्वयं ठीक करने लगे रास्ता

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कपकोट के नरगड़ा में रास्ता ठीक कर रहे ग्रामीण। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। सड़क की सुविधा न होने के कारण पैदल रास्ते पर निर्भर नरगड़ा गांव के लोग क्षतिग्रस्त मार्ग को स्वयं खोलने में लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा से क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत न होने से उन्हें आवाजाही में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। विभागों के चक्कर लगाने के बाद भी कोई कार्यवाही न होने पर उन्होंने स्वयं आपदा से ध्वस्त रास्तों को खोलने का जिम्मा ले लिया है।
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ग्राम प्रधान भागीरथी देवी का कहना है कि नरगड़ा गांव का पैदल रास्ता कपकोट को धरमघर को जोड़ता है। जिस वजह से नरगड़ा के ग्रामीणों समेत क्षेत्र की भारी आबादी रास्ता बंद होने से आवाजाही में दिक्कत सामना कर रही है। कहा कि गांव में सड़क की मांग को लेकर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। कहा कि सड़क सुविधा नहीं मिली तो ग्रामीण 2022 में विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने के लिए बाध्य हो जाएंगे। सड़क न होने से बुजुर्ग, बीमार और प्रसव पीड़िताओं को 12 किमी उबड़-खाबड़ रास्ते से डोली के सहारे कंधे में रखकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। बताया कि सस्ते गल्ले की दुकान से मिलने वाला सरकारी राशन लेने के लिए भी 12 किमी पैदल यात्रा करनी पड़ रही है। ग्रामीण तारा सिंह, जगदीश सिंह, राजेंद्र सिंह, उमेश सिंह, महेश सिंह, खीम सिंह, भूपाल सिंह आदि ने कहा कि आपदा से ध्वस्त मार्ग को ठीक करने का काम शुरू हो गया है।
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