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तीन वर्ष से रस्सी के सहारे रामगंगा नदी पार कर रहे कालापैरकाभड़ी के ग्रामीण

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बागेश्वर। प्रदेश के पूर्व सीएम और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के गृह क्षेत्र के लोगों को जरूरी सामान खरीदने के लिए ट्रॉली के सहारे रामगंगा नदी पार करनी पड़ती है। वर्ष 2018 में रामगंगा नदी में बना झूलापुल नदी के तेज बहाव में बह गया था।
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इसके बाद नया पुल भी स्वीकृत हुआ, लेकिन बन नहीं पाया। ग्रामीणों को रोजाना लोनिवि की ओर से लगाई गई ट्रॉली से नदी पार करनी पड़ रही है। ट्रॉली की रस्सी ढीली होने के कारण जोखिम बढ़ गया है। वहा पुल न बनने से क्षेत्रवासियों की नाराजगी भी बढ़ रही है।
कपकोट की महरगाड़ घाटी में वर्ष 2018 की बरसात में काफी नुकसान हुआ। रामगंगा ने क्षेत्र में भूकटाव किया। इसकी जद में आने से मोटर मार्ग, पैदल रास्ते सहित रामगंगा में कालापैरकापड़ी गांव के भकुना के पास बना पैदल पुल बह गया। पुल बहने के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के लोगों ने निरीक्षण किया।
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पुल को लेकर जमकर राजनीति भी हुई। इसके बाद ग्रामीणों के नदी से आर-पार जाने के लिए लोनिवि की ओर से एक ट्रॉली लगा दी गई। तीन वर्ष बाद अब ट्रॉली की गरारी और रस्सी ढीली हो गई है। इस पर नदी पार करने में खतरा बना रहता है। बारिश के दौरान रामगंगा के उफान पर रहने से खतरा अधिक बढ़ जाता है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने जल्द पुल निर्माण की मांग की है।
एक ट्रॉली पर निर्भर करीब छह हजार की आबादी
बागेश्वर। कालापैरकापड़ी के ग्राम प्रधान गंगा सिंह कार्की ने बताया कि रामगंगा नदी में पैदल पुल का निर्माण करीब 45 वर्ष पहले हुआ था।
पुल की मदद से माजखेत न्याय पंचायत के राज्यपाल कोश्यारी के गांव नामतीचेटाबगड़ सहित किसमिला, कालापैरकापड़ी, कनौली भकुना आदि गांवों और क्षेत्र की करीब छह हजार की आबादी नाचनी बाजार जाती थी।
पिथौरागढ़ जिले का नाचनी क्षेत्र का प्रमुख बाजार है। जहां से ग्रामीण रोजमर्रा का सामान लाने के अलावा बैंक, राशन, कपड़े, दवाइयां आदि खरीदते हैं। बाजार में कई व्यापारी भी इन्हीं गांवों के मूलवासी हैं।
पुल टूटने के बाद कालापैरकापड़ी, भकुना, किसमिला के ग्रामीण ट्रॉली के सहारे ही नदी पार करने को विवश हैं। कई लोग इस जोखिम से बचने के लिए छह किमी का फेरा लगाकर रामगंगा नदी में बने मोटर पुल का सहारा लेते हैं। हालांकि अधिकतर लोग ट्रॉली पर ही निर्भर हैं।
आवाजाही से लेकर सामान लाने तक का माध्यम बनी है ट्रॉली
बागेश्वर। पुल टूटने के बाद लगाई गई ट्रॉली को लोगों की गांव से बाजार तक आवाजाही के लिए बनाया था, लेकिन अन्य साधन न होने के कारण ग्रामीण इसी ट्रॉली की सहायता से भारी सामान, अनाज, घास तक ले आते हैं। पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण का कहना है कि बच्चों के स्कूल जाने से लेकर मरीज को अस्पताल ले जाने तक का साधन भी ट्रॉली है।
कालापैरकापड़ी को नाचनी से जोड़ने वाली पुल आपदा में बह गई थी। इसके बाद विश्व बैंक से करीब 14 करोड़ की लागत से 100 मीटर का स्वीकृत पुल नहीं बन पाया। अब इसे शासन-प्रशासन की नाकामी कहो या क्षेत्रीय विधायक का उपेक्षित रवैया स्वीकृत होने के बावजूद पुल का निर्माण नहीं हो सका और ग्रामीण ट्रॉली के सहारे रामगंगा को पार करने का जोखिम उठा रहे हैं।
- हरीश ऐठानी, जिपं सदस्य शामा/पूर्व जिपं अध्यक्ष।
नाचनी को कालापैरकापड़ी से जोड़ने वाले पुल के लिए स्वीकृत राशि कोरोना नियंत्रण में खर्च की गई है। इस कारण पुल का निर्माण नहीं हो सका। विश्व बैंक ने डीपीआर लोनिवि को सौंप दी है। अब नाबार्ड के माध्यम से पुल का निर्माण कराया जाएगा। पुल बहने के बाद लोनिवि पिथौरागढ़ ने ट्रॉली लगाई है। इसकी देखरेख और मरम्मत के लिए विभाग के संबंधित अधिकारी से कह दिया गया है।
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- बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट।
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