बागेश्वर। कपकोट के दोबाड़ गांव में एक बुजुर्ग प्रेम सिंह (75) कई दिनों से बीमारी से जूझ रहे थे। वह अस्पताल आने में असमर्थ थे। गांव पहुंचने के लिए तीन किमी की पैदल चढ़ाई की बाधा के कारण स्वास्थ्य कर्मियों ने गांव जाने में असमर्थता जताई तो रेडक्रॉस के स्वयंसेवी महेश गढ़िया आगे आए। एमएलटी के डिग्रीधारी गढ़िया ने गांव जाकर बुजुर्ग का उपचार कर मानवता की मिसाल पेश की।
कपकोट से दोबाड़ गांव की दूरी करीब 13 किमी है। वाहन से आठ किमी की यात्रा और तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पैदल पार करनी पड़ती है। इस गांव के बुजुर्ग प्रेम सिंह कई दिन से बीमार हैं। उनके दोनों पुत्र हीरा सिंह और खुशाल सिंह रोजगार के लिए कपकोट में रहते हैं।
पिता के स्वास्थ्य खराब होने का पता चलने पर पुत्र दवा लेकर गांव पहुंचे लेकिन दवा खाने के बावजूद बुजुर्ग को अधिक कमजोरी होने लगी और उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। अधिक उम्र होने के कारण उन्हें डोली की मदद से अस्पताल लाना संभव नहीं था। इसलिए रेडक्रॉस स्वयंसेवी महेश गढ़िया ने बुजुर्ग के पुत्रों से बीमारी की जानकारी ली।
डॉक्टरों से परामर्श कर ग्लूकोज, इंजेक्शन, एंटीबॉयोटिक आदि दवाइयां लेकर वह शनिवार को गांव गए। वह पूरा दिन गांव में रहकर बुजुर्ग का हालचाल लेते रहे। दोपहर तक बुजुर्ग को थोड़ा आराम मिला और उन्होंने हल्का खाना खाया। शाम को एक इंजेक्शन लगाने और पुत्रों को दवा की जानकारी देकर गढ़िया घर लौट आए।
रविवार को बुजुर्ग के पुत्र ने फोन कर उनके स्वास्थ्य में सुधार बताया। बुजुर्ग और उनके पुत्रों ने सही समय पर आकर मदद करने के लिए गढ़िया का आभार जताया। सोसायटी के वाइस चेयरमैन संजय साह जगाती, जिला सचिव आलोक पांडेय, उमेश जोशी, कैलाश प्रकाश चंदोला, जगदीश उपाध्याय जैक, हरीश दफौटी आदि ने गढ़िया के प्रयास की सराहना की है।
मेडिकल लेबोरेट्री तकनीक में डिग्रीधारी हैं गढ़िया
बागेश्वर। पेशे से व्यापारी गढ़िया रेडक्रॉस सोसायटी से जुड़े हैं। उन्होंने मेडिकल लेबोरेट्री तकनीक में डिग्री हासिल की है। पूर्व में वह जॉर्डन में स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य कर चुके हैं। वह सोसायटी के माध्यम से कपकोट के दुर्गम क्षेत्रों में कोरोना काल में जागरूकता सहित अन्य सेवाएं देकर लोगों की मदद कर रहे हैं। गढ़िया ने बताया कि डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने मेडिकल लाइन में काम किया था। इसका अनुभव काम आ रहा है।