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अस्पतालों में जांच को लैब टैक्नीशियन ही नहीं

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बागेश्वर। जिले के अस्पतालों के बहुत बुरे हाल हैं। स्थिति यह है कि जिले के अस्पतालों में लैब टैक्नीशियनों के नौ पद खाली चल रहे हैं। इससे मरीजों को भारी दिक्कतें हो रही है। प्राइवेट लैबों में जांच कराने पर मरीजों की जेब ढीली हो रही है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक जिले में लैब टैक्नीशियनों के 12 पद स्वीकृत है, जिनमें से मात्र तीन पदों पर ही नियुक्ति हुई है। इनमें से जिला अस्पताल में एक, ब्लड बैंक में एक और टीबी क्लिनिक में एक लैब टैक्नीशियन से काम चलाया जा रहा है। वहीं ब्लड बैंक समेत दो पदों पर प्रयोगशाला कर्मचारी के पद रिक्त चल रहे है। सचल चिकित्सा इकाई के लिए भी एक लैब टैक्नीशियन की नियुक्ति होनी थी। लैब टैक्नीशियन नहीं होने से लोग प्राईवेट पैथलॉजी लैबों में जाकर जांच कराने को मजबूर हो रहे है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट, कांडा, बैजनाथ, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धारी डोबा, बदियाकोट, कौसानी में लैब तकनीशियन नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छोटी-छोटी जांच के लिए भी दूर-दराज के ग्रामीणों को जिला मुख्यालय आना पड़ता है।
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कोट : लैब टैक्नीशियनों के खाली पदों की सूचना शासन को भेजी गई है। इन पदों पर नियुक्ति शासन स्तर से ही होती है। फिलहाल कई पद खाली होने पर काम पर असर पड़ रहा है। खाली पदों को भरने की कोशिश की जा रही है। - भगत सिंह रावत, सीएमओ
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