बागेश्वर जिला अस्पताल में बनाए गए 32 बेड के नए वार्ड काे शुरू करने में देरी की चाैंकाने वाली वजह सामने आई है। डेढ़ करोड़ रुपये के सिविल कार्य और ढाई करोड़ के उपकरणों के साथ यह तैयार हुआ लेकिन तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बनाया गया। इस कारण अस्पताल में बेड की कमी के बावजूद यह पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है।
कार्यदायी संस्था हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएसडब्ल्यूसी) नई दिल्ली ने दो वर्ष पहले निर्माण कार्य पूरा कर दिया था। दो महीने पहले लोक निर्माण विभाग की थर्ड पार्टी जांच में भवन को सही पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसका हैंडओवर ले लिया। अस्पताल में पहले से ही बेड की कमी बनी हुई है। फिर भी निर्माण में चूक की वजह से यह वार्ड अब तक मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सका है।
छत से पानी टपकने लगा
न स्टाफ, न उपकरण, सब भगवान भरोसे
यहां लापरवाही केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नए वार्ड के संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय स्टाफ, नर्सिंग कर्मियों और उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी अब तक कोई स्पष्ट शासनादेश जारी नहीं हुआ है। सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि 2023 में सभी 13 जिलों में बच्चा वार्ड बनाए गए थे। इनकी निविदा शासन से ही हुई थी। फिलहाल सिर्फ भवन का हैंडओवर मिला है।
सत्यापन पर उठे सवाल
संबंधित फर्म को पूर्व में भी इस बारे में पत्र भेजे गए थे। छत से पानी का रिसाव जारी है। मरीजों को ऊपर ले जाने का रास्ता नहीं बनाया है। अब शासन से कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए संस्तुति की गई है। - डॉ. गिरिजा शंकर जोशी, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल
अस्पताल में नवनिर्मित वार्ड का संचालन अब तक न करने की पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों से जुटाई जाएगी। शासन स्तर पर वार्ता कर जल्द इसे शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा। - पार्वती दास, विधायक, बागेश्वर