बागेश्वर। बागेश्वर जिले को अस्तित्व में आए 13 वर्ष बीत गए हैं लेकिन सदावाहिनी सरयू और गोमती के तट पर बसे बागेश्वर में पानी की कमी के चलते सीवर लाइन नहीं बन पा रही है।
करीब 50 हजार आबादी वाले जिला मुख्यालय में सीवर लाइन के निर्माण की मांग जिला बनने के साथ ही उठनी शुरू हो गई थी। सीवरेज सिस्टम न होने से नगर क्षेत्र 2045 भवनों का सीवर भवनों के समीप बनाए गए निजी पिटों में जाता है। सीवर लाइन न होने का असर कहीं न कहीं भूमिगत जल पर भी पड़ना लाजमी है।
सीवर लाइन बनने में सबसे बड़ी बाधा पानी की कमी है। जल संस्थान से मिले आंकड़ों के अनुसार जिला मुख्यालय को रोज 7.28 एमएलडी पानी की जरूरत है लेकिन जिला मुख्यालय के लिए बनी 6 योजनाओं से केवल 3.60 एमएलडी ही पानी मिल रहा है। पेयजल निगम के अनुसार सीवरेज सिस्टम के लिए प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की प्रतिदिन आवश्यकता होती है। जिला मुख्यालय में वर्तमान में प्रति व्यक्ति 80 लीटर ही पानी मिल रहा है।
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तीन साल और करना होगा इंतजार
जिला मुख्यालय में 1.5 एमएलडी की मंडलसेरा पंपिंग पेयजल योजना बन रही है। नगर के लिए 6 एमएलडी की जखेड़ा पेयजल योजना प्रस्तावित है। इन योजनाओं के निर्माण के बाद न केवल नगर को पर्याप्त पानी मिलेगा बल्कि सीवर लाइन के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा। इस काम में कम से कम तीन वर्ष का समय लगने की संभावना है।
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सीएम की घोषणा को बीत गए सवा दो साल
बागेश्वर। सीवरेज सिस्टम के निर्माण को लेकर जनप्रतिनधियों, लोगों ने शासन स्तर तक बात भी पहुंचाई है। 18 नवंबर 2017 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 6 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये लागत से बागेश्वर में पहले चरण की सीवर लाइन के निर्माण की घोषणा की। सीएम की घोषणा को पानी का इंतजार है।
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मंडलसेरा पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण चल रहा है। जखेड़ा पेयजल योजना का प्रस्ताव भेजा गया है। इन योजनाओं के अस्तित्व में आने के बाद ही सीवर लाइन का निर्माण हो पाएगा। - हेम चंद्र बेलवाल सहायक अभियंता पेयजल निगम बागेश्वर