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बागेश्वर में राष्ट्रीय पार्टियां चित्त, कपकोट में कांग्रेस का रंग

Tue, 20 Nov 2018 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
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केंद्र और राज्य की सत्ता में होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। हालांकि भाजपा के पांच वार्ड सदस्यों ने जीत दर्ज कर पार्टी की लाज बचाई। जबकि कपकोट में कांग्रेस ने अध्यक्ष ही नहीं बल्कि वार्ड सदस्यों के चुनाव मेें भी अपना रंग जमाया।  
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बागेश्वर में चुनावी पंडितों के विश्लेषण और तमाम अनुमानों को धता बताते हुए निर्दलीय सुरेश खेतवाल ने निकाय में भी भाजपा के सरकार बनाने के मंसूबे की हवा निकाल दी। हालांकि निकाय में वार्ड सदस्यों की सर्वाधिक पांच सीटों पर जीत ने भाजपा की हार का गम कुछ कम किया। यहां बसपा को तीसरे स्थान पर आने का सूकून मिला। हालांकि पहले बसपा खुद को भाजपा के साथ मुकाबले में मान रही थी। कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही। पार्टी को अध्यक्ष पद पर भाजपा के बागी निर्दलीय प्रमोद मेहता से भी पिछड़ना पड़ा। जबकि शुरूआत में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच ही टक्कर मानी जा रही थी। दूसरी ओर कपकोट में कांग्रेस ने भाजपा के हाथ से निकाय की सरकार की चाबी छीन ली। कपकोट में हुआ रिकार्ड तोड़ मतदान का परिणाम कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में गया। इतना ही नहीं, कपकोट में सर्वाधिक चार वार्ड सदस्य भी कांग्रेस के हाथ पर ही जीते। 

भाजपा को सता रहा एंटी इंक ंबेंसी का डर 
बागेश्वर। नगर निकाय चुनाव को अगले साल होने वाले लोस चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था। इस सेमीफाइनल मुकाबले के परिणाम बेहद चौंकाने वाले हैं। कपकोट के परिणाम साफ तौर पर भाजपा के लिए एंटी इंकम्बेंसी के खतरे की घंटी बजा रहा है। भाजपा के लिए कमोवेश यही हाल बागेश्वर में भी रहा। केंद्र और राज्य की सत्ता में होने का फायदा भी भाजपा नहीं उठा पाई। इसके इतर कपकोट में कांग्रेस को सेमीफाइनल मुकाबले की तैयारी के दौरान सकारात्मक नतीजे की संजीवनी मिली है। हालांकि बागेश्वर में कांग्रेस की सोचनीय हालत खुद में सवाल उठा रही है। ब्यूरो 
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