कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो तो पहाड़ जैसी चुनौतियां भी बौनी साबित होती है। इसे सच कर दिखाया है कुमाऊं मंडल की चार जांबाज बेटियों ने। कपकोट में आयोजित राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता में मुनस्यारी, टनकपुर, बागेश्वर और कपकोट की इन महिला पायलटों ने जब नीले गगन में कलाबाजियां दिखाईं तो हर कोई दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गया। वर्तमान में उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अंतर्गत सक्रिय रूप से पैराग्लाइडिंग कर रहीं ये चार लड़कियां समूचे प्रदेश के लिए गौरव का प्रतीक बन गई हैं।
चारों पायलटों ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने प्रशिक्षक तानाजी ताकवे को दिया है। प्रियंका धामी, शीतल ठाकुर, महिमा बिष्ट और तनुजा कांडपाल का कहना है कि 2023 में टिहरी में उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अंतर्गत ट्रेनिंग के दौरान तानाजी ने ही उनके भीतर से ऊंचाई के डर को जड़ से खत्म किया। उनका मानना है कि तानाजी की बेहतरीन ट्रेनिंग और मार्गदर्शन की बदौलत ही वे आज इस चुनौतीपूर्ण मुकाम तक पहुंच पाई हैं। इन बेटियों की उड़ान अभी थमी नहीं है। उनके सपने और भी ऊंचे हैं। चारों महिला पायलटों का कहना है कि यदि आज भी उन्हें तानाजी जैसा कुशल मार्गदर्शन मिलता तो वे भारत की पहली महिला एक्रोबैट पायलट और स्पीड विंग पायलट बनने का अपना गौरवशाली सपना जल्द पूरा कर लेतीं।
महिलाएं आज वह सब कर सकती हैं जो पुरुष कर रहे हैं, बस जरूरत परिवार के भरोसे और सहयोग की है। मुझे बचपन से ही कुछ अलग कर दिखाने का जुनून था, इसलिए मैंने एडवेंचर स्पोर्ट्स को अपना कॅरिअर चुना। रिस्क लेना मुझे पसंद है और इसी साहस के बल पर आज मैं टेंडम पायलट बन सकी हूं। - .प्रियंका धामी, मुनस्यारी