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लॉकडाउन से उबर नहीं पाए थे मशरूम उत्पादक, अब पड़ी कोविड कर्फ्यू की मार

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बागेश्वर। कपकोट के तमाम इलाकों में मशरूम का उत्पादन किया जाता है। पिछले साल के लॉकडाउन से पहले यह लोग मशरूम उत्पादन से अच्छी कमाई कर रहे थे। अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। मशरूम उत्पादक लॉकडाउन की मार से उबर नहीं पाए थे कि फिर कोविड कर्फ्यू लग गया। ढाई से तीन सौ रुपया किलो बिकने वाला मशरूम घर पर बर्बाद हो रहा है।
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कपकोट के लीती में 15 किसान मशरूम उत्पादन करते हैं। मशरूम उत्पादक गोविंद कोरंगा, दीपा देवी, राधा देवी, बलवंत सिंह ने बताया कि शामा, कपकोट, बागेश्वर में मशरूम बेचते थे। कोविड कर्फ्यू के कारण मशरूम नहीं बेच पा रहे हैं। अकेले लीती में ही 50 किलो से अधिक मशरूम डंप हो गया है, जो बर्बाद हो रहा है। लीती के अलावा शामा, पन्याली, भनार गांव में भी लोग मशरूम का उत्पादन करते हैं। कोविड कर्फ्यू ने इन लोगों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। मशरूम उत्पादकों का कहना है कि सरकार को मशरूम उत्पादकों को राहत देने के लिए आगे आना चाहिए।
80 बैगों में मशरूम उत्पादन कर रही हूं। ढाई सौ से तीन सौ रुपया किलो मशरूम बिक जाता था। कोविड कर्फ्यू के कारण मशरूम बाहर नहीं ले जा पा रहे हैं। घर पर ही मशरूम बर्बाद हो रहा है। - धना कोरंगा मशरूम उत्पादक लीती बागेश्वर
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मशरूम न बिकने से मशरूम उत्पादकों को खासा नुकसान हो रहा है। मशरूम उत्पादन से होने वाली आय से घर चलाने में मदद मिलती थी। मशरूम बर्बाद हो रहा है। वह लोग परेशान हो गए हैं। - कलावती देवी मशरूम उत्पादक लीती बागेश्वर
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