सहस्रधारा की यात्रा पर जाते पूर्व सीएम।
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी बुधवार सुबह सहस्रधारा की पैदल यात्रा पर रवाना हुए। सरयू घाटी के विभिन्न हिस्सों में ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। कोश्यारी ने कहा कि पतित पावनी मां सरयू का पुराणों में खास वर्णन है। सरमूल को धार्मिक पर्यटन के लिए विकसित करने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे। अयोध्या तक विभिन्न नामों से जानी जाने वाली असली सरयू यही है।
बुधवार सुबह पूर्व सीएम कोश्यारी वन विश्राम भवन से कार से रीठाबगड़, दुलम और बांसे होते भद्रतुंगा पहुंचे। सभी जगह ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया। भद्रतुंगा में महंत देवानंद दास से आशीर्वाद लेक वह सहस्रधारा की पैदल यात्रा पर निकले।
कार्यक्रमों में कोश्यारी ने कहा कि सरयू नदी का इतिहास हमारी महान संस्कृति से जुड़ा है। इस क्षेत्र का विकास जरूरी है। उन्होंने साथ में चल रहे अधिकारियों को सहस्रधारा और सरमूल क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए, ताकि सीएम और संस्कृति मंत्रालय से बात की जा सके। इस दौरान विधायक बलवंत भौर्याल, ब्लाक प्रमुख मनोहर राम, नगर पंचायत अध्यक्ष चंपा देवी, भाजपा नगर अध्यक्ष गीता ऐठानी, सांसद प्रतिनिधि दयाल ऐठानी, सुरेश गढ़िया, दयाल कुमल्टा, भगवत कोरंगा, बबलू ऐठानी, सुंदर देव आदि थे।
सहस्रधारा की यात्रा पर जाने वाले कोश्यारी पहले नेता
बागेश्वर। सहस्रधारा की यात्रा पर जाने वाले भगत सिंह कोश्यारी पहले नेता हैं। कोश्यारी का जनेऊ संस्कार भी इसी महान तीर्थ पर हुआ था। भद्रतुंगा से करीब नौ किमी दूर सहस्रधारा तक आने जाने के लिए सरयू को कम से कम 16 जगह आर-पार करना पड़ता है। इस बार विधायक बलवंत भौर्याल ने अपनी निधि से सरयू लकड़ी के करीब 16 अस्थाई लकड़ी के पुलों का निर्माण किया है। वहां जाने के पैदल रास्ता भी बनाया गया है, जिससे लोगों को आवागमन में सुविधा हो रही है।