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अनुष्का को ममता की छांव दे रही सरस्वती

Sun, 14 May 2017 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
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सरस्वती बिष्ट - फोटो : अमर उजाला
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 बागेेश्वर। वन विभाग में संविदा पर नौकरी कर परिवार का गुजर-बसर करने वाले पति। हाइस्कूल, इंटर में पढ़ने वाले दो बेटे। चलने-फिरने में असहाय 75 साल की मौसी, 86 साल की गांव की ही एक वृद्ध महिला के पालन-पोषण की जिम्मेदारी। इसके बावजूद अस्पताल में छठी बेटी होने पर जब उसके माता-पिता ने उसके पालन-पोषण में असमर्थता जताई तो चौरासी गांव निवासी सरस्वती बिष्ट ने तुरंत उसे अपना लिया। गोद ली गई इस बेटी को वह डॉक्टर बनाना चाहती हैं। 
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सरस्वती भले ही साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हों लेकिन उनकी सोच और समाज के प्रति उनका समर्पण सभी को नतमस्तक कर देता है। सरस्वती के परिवार में पति विजय सिंह, 24 साल का बड़ा बेटा तेजपाल और 19 साल का छोटा बेटा मुकुल है। तीन साल पहले तक वन विभाग में संविदा पर कार्यरत पति को इतना पैसा नहीं मिलता था कि परिवार का ठीक तरह से भरण-पोषण हो सके। इसके बावजूद उन्होंने बेसहारा मौसी बिश्नुली देवी समेत गांव की ही 84 वर्षीय वृद्ध महिला तारा देवी को भी अपने घर में आसरा देकर उनकी सेवा शुरू की।

तीन साल पहले जब सरस्वती किसी मरीज के साथ जिला अस्पताल पहुंची थीं तो वहां पर उन्हें छठी बेटी होने पर उसे पालने में असमर्थ मां-बाप दिखे। जब उन्होंने देखा कि अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी बेटी को अपनाने को कोई तैयार नहीं है तो उन्होंने बेहिचक उसे गोद ले लिया। सरस्वती देवी की उंगली पकड़कर चलना सीखने वाली अनुष्का को जून में तीन साल पूरे हो जाएंगे। दो बेसहारा वृद्ध महिलाओं और एक बेटी को अपनाकर तीनों की सेवा करने वाली सरस्वती बिष्ट के कार्यों को देखते हुए नागरिक मंच ने उनको सम्मानित किया।
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उनके कार्यों को देखते हुए वर्ष 2015 में उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सरस्वती का कहना है कि उन्होंने कभी न तो बेटे-बेटी में और न समाज के किसी व्यक्ति में अंतर समझा। उनका कहना है कि वह तमाम अभावों के बावजूद अनुष्का की ठीक से परवरिश करने का प्रयास कर रही हैं। उनका सपना उसे डॉक्टर बनाने का है। वह कहती हैं कि बेटी डॉक्टर बनेगी तो वह भी समाज के कई जरूरतमंदों की सेवा कर सकेगी।

एक बच्ची के साथ ही दो वृद्ध महिलाओं की देखभाल कर रही सरस्वती कहती हैं कि आदमी जब बूढ़ा हो जाता है तो वह भी बच्चा बन जाता है। उन्होंने कहा कि दोनों वृद्ध महिलाओं का भी वह मां बनकर ही देखभाल करती हैं। हर दिन किसी बीमार को अस्पताल पहुंचाने से लेकर तमाम तरह के सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहने वाली सरस्वती कहती हैं कि यह उनका सौभाग्य है कि भगवान ने उन्हें इस तरह के कार्य के लिए चुना है।   
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