बैंकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में पांच बैंक शामिल रहे। भारतीय स्टेट बैंक ने हड़ताल का समर्थन नहीं किया। बैंकों की हड़ताल के कारण दिनभर ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक अनुमान के मुताबिक हड़ताल के कारण जिले में दो करोड़ का कारोबार प्रभावित रहा। बैंक कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया।
हड़ताली बैंक कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि बैंक विरोधी नीतियों के कारण बैंक कर्मचारियों के हितों को नुकसान हो रहा है। कर्मचारियों ने ग्रामीण बैंकों के पेंशन समानता निर्णय मूल भावना के अनुरूप लागू करने, ग्रामीण बैंकों के राज्य स्तरीय ढांचे का निर्माण किए जाने सहित अखिल भारतीय महासंघों के 12 सूत्रीय समस्याओं का तुरंत समाधान करने की मांग की।
वहां ग्रामीण बैंक कर्मचारी संघ के राजेंद्र मेहता, जगदीश प्रसाद, आशुतोष पांडे, माधवी राय, वंदना, राजेंद्र प्रसाद, घनानंद पांडे, अनुराग मिश्रा, मुनीर खान, इंदु मटियानी, जेजे भंडारी, प्रकाश उपाध्याय, अमित काला, मनोज दरमवाल, हितेश धपोला आदि थे। इधर नैनीताल बैंक, सैंट्रल बैंक, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारियों ने भी हड़ताल का समर्थन करते हुए कार्य बहिष्कार किया।
हड़ताल के कारण ग्राहकों व व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक के कार्य से आया हुआ था, मुझे तत्काल रुपयों की आवश्यकता थी, लेकिन हड़ताल के कारण मैं अपने रुपये नहीं निकाल सका। - कुंदन गिरि, बैंक उपभोक्ता
हड़ताल के कारण दुकान की रकम बैंक से नहीं निकाल सका। हड़ताल के कारण मुझे काफी नुकसान हुआ है। सरकार को तत्काल हड़ताली बैंक कार्मिकों की मांग माननी चाहिए। - गुड्डू साह, व्यापारी