मॉक ड्रिल के दौरान आपदा कंट्रोल रूम में काम करते कर्मचारी।
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम पर आधारित वनाग्नि से निपटने के लिए मॉक ड्रिल किया गया। छतीना, पौड़ी बैंड के हरिद्वारछीना और कठायतबाड़ा के समीप आरे बाइपास में मॉक ड्रिल किया गया।
आग लगने की सूचना मिलते ही इंसीडेंट कमांडर ने सभी रेस्क्यू टीमों को स्टेजिंग एरिया पुलिस लाइन माल्ता में एकत्रित होने के निर्देश दिए । सभी टीमों को स्टेजिंग एरिया से खोज बचाव के लिए तथा वनाग्नि वाले क्षेत्रों में वनाग्नि को बुझाने के लिये रवाना किया गया। तेज सायरन के साथ वाहनों का काफिला वनाग्नि वाले क्षेत्र हरिद्वार छीना, पौड़ी बैंड, आरे वाईपास तथा छतीना के लिए रवाना हुआ।
सभी स्थलों में रेस्क्यू टीमों द्वारा घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का काम किया। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने हरिद्वारछीना के पास लगी आग पर काबू पाने के लिए मौके पर जाकर वनाग्नि की क्षति की जानकारी ली और रेस्क्यू टीम के कर्मचारियों को तत्काल वनाग्नि पर काबू पाने के निर्देश दिए। मॉक ड्रिल में छतीना के जंगल में वनाग्नि के कारण दो कर्मचारी एवं एक ग्रामीण वनाग्नि को बुझाने में आग से घिर जाने के कारण मामूली रूप से घायल हुए।
दो लोगों का मौके पर उपचार किया गया। एक कर्मचारी को जिला अस्पताल भेजा गया। आग से दो बकरियां मामूली रूप से झुलसी। पौड़ी बैंड के पास वनाग्नि से दो हेक्टेयर जंगल जल गया जिसमें दो ग्रामीण तथा एक गाय मामूली रूप से घायल हो गई। कठायतबाड़ा में तीन हेक्टेअर जंगल जल गया इसमें किसी भी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई। हरिद्वारछीना के पास दो हेक्टेअर जंगल जल गया जिसमें वनाग्नि को बुझाने में लगे रेस्क्यू टीम दो कर्मचारी तथा दो ग्रामीण सहित चार लोग मामूली रूप से घायल हो गए। मॉक ड्रिल में एसपी सुखवीर सिंह, गणेश पांडे, एसडीएम रिंकू बिष्ट, बीपी मौर्या, प्रभागीय वनाधिकारी एमबी सिंह, एसडीओ सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी, जिला विकास अधिकारी केएन तिवारी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल आदि कर्मचारी मौजूद थे।