गोमती पुल से लेकर सरयू नदी में बने झूला पुल तक बागनाथ वार्ड आता है। सरयू-गोमती संगम पर स्थित ऐतिहासिक बागनाथ मंदिर और चौक बाजार इसी वार्ड में स्थित हैं। इस वार्ड का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी वार्ड में वह संगम स्थल मौजूद हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां पर डुबकी लगाने से जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है लेकिन, इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जिस संगम पर लाखों लोगों की आस्था है वह संगम ही साफ सुथरा नहीं है।
संकरी सी गलियां, कई जगहों पर मार्ग में बहता होटल-रेस्टोरेंटों का गंदा पानी, गोमती नदी में बने पुराने पुल के नीचे से लेकर अंग्रेजों के जमाने में बने झूला पुल तक बिखरा कूड़ा। संगम स्थल पर धूल-मिट्टी से अटे स्नान घाट और परिसर, घाट के किनारे जगह-जगह पर पड़ी गंदगी और स्नान घाट से महज 20 मीटर की दूरी पर शव दाह के बाद इधर-उधर बिखेरी गई अधजली लकड़ियां। कुछ यही तस्वीर है बागनाथ वार्ड की। देश के कोने-कोने से हर साल यहां पर्यटक आते हैं। इनमें बड़ी संख्या स्नान के लिए आने वाले पर्यटकों की रहती है, परंतु सफाई नहीं होने से श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बागनाथ वार्ड की सभासद नंदी परिहार ने कहा कि अमर उजाला की पहल सराहनीय है। सरयू संगम पर सफाई व्यवस्था जरूरी है। इस पर ध्यान भी दिया जा रहा है। वार्ड में शौचालय और कूड़ेदान की व्यवस्था है। महिलाओं के लिए अलग से स्नान घाट बनाने की जरूरत है। सरयू नदी में सभी की आस्था है लोगों को इसे साफ और स्वच्छ रखने के लिए स्वयं भी पहल करनी होगी।