बागेश्वर। बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) की टीम ने जिला मुख्यालय में एक नाबालिग की शादी रुकवा दी। पुलिस की मदद से टीम ने दोनों पक्षों को शादी से रोका और लड़की के बालिग होने पर ही शादी कराने का लिखित करारनामा भी कराया। ओएससी की टीम सात नाबालिगों की शादी रुकवा चुकी है।
बृहस्पतिवार को तहसील मार्ग पर एक विवाह का कार्यक्रम चल रहा था। कोरोना के चलते सादे समारोह में कार्यक्रम संपन्न किया जा रहा था। एकाएक पुलिस और ओएससी के कर्मचारी मंडप में पहुंच गए। पुलिस को बरात में देख वहां मौजूद लोग सकपका गए। टीम ने बताया कि किसी ने यहां पर नाबालिग के विवाह होने की सूचना 112 के माध्यम से दी है।
इसके बाद दुल्हन बनी लड़की का जन्मतिथि प्रमाणपत्र मांगा। हालांकि लड़की के परिजन बेटी को बालिग बताते रहे। इस दौरान पुलिस, वन स्टॉप कर्मचारी और लड़की के परिजनों के बीच देर तक बात होती रही, लेकिन पुलिस ने प्रमाणपत्र दिखाने के बाद ही शादी की अनुमति देने की बात कही।
इसके बाद परिजनों ने लड़की के स्कूल का सर्टिफिकेट दिखाया, जिसके अनुसार उसकी उम्र 16 वर्ष थी। प्रमाणपत्र देखने के बाद टीम ने शादी रोक दी और लड़के एवं लड़की पक्ष के लोगों को नाबालिग की शादी करने पर होने वाले दुष्प्रभाव बताए। इसके बाद लड़के पक्ष वालों ने लड़की के बालिग होने पर शादी करने पर सहमति जताई।
दोनों पक्षों से लिखित करार के बाद लड़के वाले बरात लेकर लौट गए। इधर बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र प्रसाद बिष्ट ने बताया कि जिला मुख्यालय के तहसील मार्ग में नाबालिग की शादी की सूचना मिली थी। इसके बाद ओएससी की टीम ने समय पर जाकर विवाह होने से रोका।