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जोड़ीदार दीवान दा के जाने से अधूरे रह गए कई गीत : डाॅ. ढौंडियाल

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बागेश्वर। अजय-दीवान की जोड़ी के दीवान कनवाल के असमय निधन से जिले में बसे उनके चाहने वाले बेहद गमगीन हैं। इस साल के उत्तरायणी मेले में इस जोड़ी ने नुमाइशखेत मैदान के मुख्य मंच से अपनी गायकी के रंग बिखेरे थे। कनवाल के यूं साथ छोड़कर जाने से उनके जोड़ीदार डॉ. अजय ढौंडियाल बेहद दुखी और भावुक हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में डॉ. अजय ने बताया कि लोगों ने उनकी जोड़ी को खूब प्यार दिया। कई गीतों के हिट होने के बाद दोनों जोड़ीदार मिलकर गायकी में कई अभिनव प्रयोग कर रहे थे। दीवान दा के बीमार होने से पहले प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत की एकमात्र कुमाऊंनी कविता फुलन छै के बुरुंश, जंगल जस जलि जां... को आवाज दी थी लेकिन इसकी वीडियो शूट नहीं कर सके। इसके अलावा चैती, हीरा सिंह राणा के कुछ गीत, युवाओं के लिए जनगीत भी तैयार करना था लेकिन नियति के आगे किसकी चलती है।


बुरांश के फूल खिलने का था इंतजार, दीवान दा हो गए बीमार
डॉ. ढौंडियाल ने बताया कि सुमित्रानंदन पंत के गीत गाने के बाद शूटिंग के लिए बुरांश के फूल खिलने का इंतजार कर रहे थे। मार्च में बुरांश के फूल खिलते हैं लेकिन उससे पहले ही दीवान दा बीमार पड़ गए। हालांकि बीमारी के दौरान भी वह अप्रैल में शूटिंग करने की बात कर रहे थे। अब बुरांश तो फूलने लगे हैं लेकिन शूटिंग करने के लिए दीवान दा नहीं रहे। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
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मन से हार गए थे दीवान, जीने की नहीं थी आस
डाॅ. अजय बताते हैं कि दीवान कनवाल बीमारी से नहीं, मन से हार मानने के कारण दुनिया को छोड़ गए। बीमार होने के बाद से वह मायूस से हो गए थे। उनके जीवन में उत्साह की जगह निराशा घर कर गई थी। फोन पर बातचीत के दौरान भी वह जिंदा नहीं बचने की आशंका जताते। चिकित्सकों की नजर में उनकी बीमारी गंभीर नहीं थी लेकिन उन्होंने ही जीने की आस छोड़ दी थी। रंगकर्मी भाष्कर भौर्याल ने बताया कि युवाओं से भी वह ऐसी ही मायूस करने वाली बातें करने लगे थे। कहते थे कि मुझसे जो सीखना है जल्दी सीख लो, मेरे पास समय बाकी नहीं है।
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फोटो 11 बीजीएस 14 पी
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