सरकारी आंकड़ों की मानें तो निकटवर्ती ग्राम बिलौना में प्रत्येक परिवार को शौचालय मिल चुके है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस गांव में आज भी दो दर्जन से अधिक परिवारों के पास शौचालय नहीं है, जिसके कारण यह परिवार खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
बागेश्वर शहर का निकटवर्ती बिलौना गांव कागजों में ओडीएफ है। इस गांव में सभी परिवारों के शौचालय बन चुके हैं। लेकिन यहां जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गांव में दो दर्जन से अधिक परिवारों के पास अपने शौचालय नहीं बने हैं। इन परिवारों के लोग शौच के लिए खुले में जाने के लिए मजबूर हैं। स्वजल परियोजना के लेखाधिकारी संजय बिष्ट ने बताया कि 2012 की सर्वे के आधार पर बिलौना में कुल 553 परिवार थे। जिनमें से 402 के पास शौचालय था। शेष बचे 151 परिवारों को शौचालय मुहैया कराया जा चुका है। उसके बाद जो परिवार बढ़े होंगे वह अगली सर्वे में आएंगे तो उन्हें भी शौचालय दिया जाएगा।
कोट.....
मेरे पास शौचालय नहीं है। मैं कई महीनों से शौचालय की मांग कर रहा हूं। मांग अभी तक पूरी नहीं हो पा रही है। शौचालय के अभाव में खुले में शौच जाना मजबूरी है।
- सुरेश चंद्र, बिलौना
शौचालय की मांग को लेकर पहले ब्लाक, फिर स्वजल से संपर्क किया था। लेकिन शौचालय नहीं मिल सका। कई अन्य परिवार भी हैं जिनके पास शौचालय नहीं है।
- हरीश राम, बिलौना
सरकार ने पता नहीं किस आधार पर ओडीएफ जिला घोषित किया है। मेरे साथ कई अन्य परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। - जैत राम, बिलौना
बिलौना में कई परिवार हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। शौचालय के अभाव में खुले में शौच जाना मजबूरी है। स्वजल, ब्लाक सहित नगर पालिका से शौचालय मुहैया कराए जाने की मांग की है।
- भूपेंद्र सुयाल, सभासद, नगर पालिका बिलौना वार्ड
पूर्व में स्वजल ने गांव के 151 शौचालय विहीन परिवारों को शौचालय मुहैया कराए थे। जो कि वर्ष 2012 की गणना के आधार पर चयनित किए गए थे। लेकिन उसके बाद कई परिवार बढ़े हैं। जिनके पास शौचालय नहीं है। बिलौना में दो दर्जन से अधिक परिवार हैं जिनके पास शौचालय नहीं हैं।
- कैलाश गढ़िया, पूर्व प्रधान बिलौना