एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना की ओर से यहां दो दिवसीय जेंडर अभिमुखीकरण कार्यशाला हुई। मास्टर ट्रेेनरों से आजीविका संघ से जुड़े सदस्यों और पदाधिकारियों को आमदनी बढ़ाने के लिए नकदी फसलों, बेमौसमी सब्जियों और अच्छी नस्ल के गाय, भैंसों को पालनेे पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की बाजार में काफी मांग है।
एक होटल में मास्टर ट्रेनर कमल जोशी ने जेंडर संबंधी जानकारियां विस्तार से दी। आजीविका के सहायक प्रबंधक एवं संस्थाएं धर्मेंद्र पांडे ने परियोजना द्वारा गरुड़ ब्लाक में संपादित विभिन्न क्रियाकलापों के बारे में बताया। समूहों के खातों में अब तक विभिन्न उत्पादों की बिक्री का 1.10 करोड़ रुपये जमा करा दिया है।
कपकोट क्षेत्र में परियोजना सहायतित सहाकारिताओं और व्यापारिक गतिविधियों से अपनी आजीविका बढ़ा रहे हैं। वहां ईको टूरिज्म पर सराहनीय काम हो रहा है। वक्ताओं ने कहा कि जेंडर के तहत अब तक 60 प्रतिशत महिलाएं जुड़ चुकी हैं। सहायक निदेशक सहकारिता देवेंद्र जोशी ने सहकारिता के बारे में बताया।
यहां सहायक प्रबंधक मूल्यांकन अनुश्रवण प्रदीप नेगी, आंतरिक ऑडीटर रोहित अरोड़ा, परियोजना सहायक सुनील भट्ट, तकनीकी समन्वयक चंद्रमणि उनियाल, बैजनाथ आजीविका संघ की अध्यक्ष चंपा देवी, अन्नपूर्णा आजीविका संघ की लता किरौला, हिमगिरी आजीविका संघ की चंपा गोस्वामी, संजीवनी और दिव्येश्वरी आजीविका संघ के सदस्य भुवनेश्वरी महिला का स्टाफ, विरेंद्र गोसाईं और विशन सिंह लुम्याल आदि मौजूद थे।