बागेश्वर। भांग की खेती करने वाले लोगों के घरों में छापा पड़ने की अफवाह पर धूराफाट क्षेत्र की महिलाओं ने घरों में रखे भांग के बीज से लेकर रस्सियां बनाने के काम आने वाले रेशे तक जला दिए। यह मामला पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि पुलिस, राजस्व विभाग को इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।
बताया जा रहा है कि रविवार को धूराफाट क्षेत्र में किसी ने नारकोटिक्स विभाग की टीम द्वारा भांग की खेती करने वालों के घरों में छापा मारने की अफवाह उड़ाई। इसके बाद महिलाओं में यह चर्चा चली कि छापा मारने वाली टीम के पास ऐसे उपकरण हैं, जिनसे छुपाए गए भांग के बीज तक का पता चल जाएगा।
यह अफवाह ऐसी उड़ी कि देखते ही देखते धूराफाट क्षेत्र के 12 गांवों तक पहुंच गई। इसके बाद महिलाओं ने अपने-अपने घरों में बीज आदि उपयोगों के लिए रखे गए भांग सहित रस्सियां बनाने के लिए इकट्ठा किए गए भांग के रेशों को भी जला दिया। एक व्यक्ति ने बताया कि रविवार की शाम को क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में कई खेतों में आग दिखी। भांग, रेशों को जलाने के बाद क्षेत्र के लोगों को अफवाह का एहसास हुआ।
बागेश्वर। भांग से तैयार होने वाले चरस, गांजे जैसे नशीले पदार्थों के कारण भांग की खेती की इजाजत नहीं है। पर्वतीय क्षेत्र में करीब 90 प्रतिशत लोग खेती किसानी से जुड़े हैं। कुछ लोग अन्य फसलों के साथ भांग भी बोते हैं लेकिन केवल अपनी जरूरत के लिए सीमित क्षेत्रफल में होने के कारण इस बुवाई का रकबा नगण्य होता है। कृषि विभाग में भी भांग की खेती की बुवाई के आंकड़े निल हैं।
बागेश्वर। भांग की खेती भले ही प्रतिबंधित हो लेकिन इसका बीज सभी जगह मिल जाता है। भांग के बीज की गर्म तासीर होने के कारण पर्वतीय क्षेत्र में शीतकाल में इसे उपयोग में लाया जाता है। भांग के बीज का उपयोग कुछ खास सब्जियों, चटनी बनाने में किया जाता है। भांग के बीज की चटनी के साथ बड़ा नींबू सानकर (चूक) खाने का पहाड़ में विशेष प्रचलन है।