ग्राम छौना में हुए हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा ने हत्याभियुक्त भतीजे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 13 अप्रैल 2018 की शाम तीन बजे ग्राम छौना (पंद्रहपाली) निवासी गणेश दत्त जोशी (55) पुत्र कृष्णानंद जोशी का अपने अपने भतीजे गिरीश जोशी पुत्र लीलाधर जोशी से विवाद हो गया था। इसी बीच गिरीश ने घर के आंगन में रखे बढ़ियाठ (धारदार हथियार) से गणेश दत्त जोशी पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बीचबचाव को आई गणेश की पत्नी गंगा देवी को भी उसने बढ़ियाठ से हमलाकर घायल कर दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। गंगा देवी ने मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई। कोतवाल टीआर वर्मा ने मामला 302, 324, 504, 506, 336 के तहत दर्ज कर जांच की।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में हत्या में प्रयुक्त बढ़ियाठ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्रयोगशाला लैब की रिपोर्ट पेश की। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता आबिद हसन, सहायक चंचल सिंह पपोला ने पैरवी करते हुए 11 गवाह पेश किये। अदालत ने अभियुक्त गिरीश जोशी को धारा 302 में आजीवन कारावास और 20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कारावास होगा।
धारा 324 में एक वर्ष कारावास, पांच हजार अर्थदंड की सजा हुई। अर्थदंड न देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास होगा। धारा 506 में आरोपी को एक वर्ष कारावास, पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अभियुक्त वर्तमान में जिला जेल में बंद है। कोतवाली के पैरोकार जितेंद्र तिवारी, गणेश टोलिया, राजेंद्र नाथ गोस्वामी, नवीन लाल ने भी प्रभावी पैरोकारी की।
पीड़िता को मिलेगी अर्थदंड की राशि
बागेश्वर। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि अभियुक्त गिरीश जोशी पर लगाये गये अर्थदंड की राशि पीड़िता को दी जाएगी। न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आदेश दिया कि वह धारा 357 के तहत अपराध से पीड़ित गंगा जोशी को नियमानुसार प्रतिकर देना सुनिश्चित करें। साथ ही पीड़िता के परिवार को संरक्षण देने का आदेश भी दिया है।
पंडिताई का विवाद बना हत्या की वजह
बागेश्वर। ग्राम छौना, पंद्रहपाली में गणेश दत्त जोशी की हत्या की वजह दोनों परिवारों के बीच पंडिताई का विवाद रहा। पुलिस के अनुसार, हत्याभियुक्त गिरीश जोशी के पिता स्व. लीलाधर जोशी और गणेश जोशी साथ ही पंडिताई का कार्य करते थे। पिता की मौत के बाद गिरीश जोशी ने पंडिताई का कार्य शुरू किया। लेकिन, बताते हैं कि गिरीश जोशी का चाल-चलन सही नहीं होने के चलते जजमानों ने उन्हें बुलाना बंद कर दिया। अधिकांश लोग चाचा गणेश जोशी को बुलाने लगे, जिससे गिरीश अपने चाचा से रंजिश रखने लगा। इसी बात को लेकर दोनों में आए दिन झगड़े होने लगे। इसी विवाद में गिरीश ने चाचा गणेश जोशी की हत्या कर दी।