हवालबाग ब्लॉक के नैनोली गांव में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को शिकारी लखपत सिंह ने आखिरकार मार ही दिया। तेंदुआ सांझ ढलने के बाद मार्ग से गांव की तरफ आ रहा था। करीब ढाई सौ मीटर के फासले में बैठे शिकारी लखपत सिंह ने एक गोली में उसे मार गिराया। लखपतसिंह के अनुसार मारा गया तेंदुआ नर है और बूढ़ा है। इधर तेंदुए के मारे जाने की सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने चैन की सांस ली।
नैनोली गांव में तेंदुए को मारने के लिए वन विभाग और शिकारी पिछले 12 दिनों से तैनात थे। इस दौरान तेंदुआ एक-दो बार ही दिखाई दिया था, लेकिन नजदीक नहीं होने के कारण उसे मारा नहीं जा सका था। बुधवार को बागेश्वर से लौटे शिकारी लखपत सिंह ने दूसरे साथी हरीश सिंह के साथ शाम के समय गांव की तरफ आ रहे तेंदुए के सीने में गोली चलाकर उसे मार गिराया। लखपत सिंह ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि करीब ढाई सौ गज की दूरी से उन्होंने तेंदुए पर गोली चलाई और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मारा गया तेंदुआ उनका 51वां शिकार है। उन्होंने बताया कि यह काफी बूढ़ा है और करीब 14 साल का है। इसके दांत भी घिस चुके हैं। इसलिए यह आसान शिकार की तलाश में रहता था। उन्होंने बताया कि तेंदुए की लंबाई करीब साढ़े सात फुट है। इधर वन क्षेत्राधिकारी बिशन लाल ने बताया कि तेंदुए के मारे जाने का समाचार मिलते ही गांव में खुशी की लहर है। इससे पूर्व मंगलवार रात भी तेंदुआ गांव में दिखाई दिया था। लेकिन शिकारी हरीश सिंह के निशाना साधने से पहले वह ओझल हो गया था।