जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला जज डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा कि कानून की जानकारी रखनेेे वालों का कभी भी उत्पीड़न नहीं हो सकता है। उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने को कहा।
कानून और शासन की नीतियों की जानकारी होने और मनोवृत्ति बदलने से घरेलू हिंसा रोकी जा सकती है। पुरुषवादी सोच को भी बदलने की आवश्यकता है। वह राजकीय बालिका इंटर कालेज कांडा में आयोजित शिविर की अध्यक्षता कर रहे थे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष और जिला जज डा. शर्मा ने युवाओं से छोटे-छोटे उद्योग लगाकर स्वरोजगार अपनाने को कहा।
रोजगारपरक शिक्षा में टाइपिंग और कंप्यूटर ज्ञान आदि तकनीकी शिक्षा लेने पर जोर दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश सिंह ने पाक्सो अधिनियम 2012 की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक समस्या का समाधान सामाजिक जागरूकता से ही संभव है।
प्राधिकरण की सचिव ज्योत्सना ने बच्चों को लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण और खुद की सुरक्षा के बारे में बताया। एसडीएम रेखा कोहली ने आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के बारे में बताया। सीओ धनी राम ने घरेलू हिंसा, बाल विवाह, दहेज प्रतिषोध अधिनियम, दहेज हत्या और यातायात अधिनियम के बारे में बताया।
उत्तराखंड बार के अध्यक्ष गोविंद भंडारी ने शिविर के आयोजन पर जिला जज का आभार जताया। संचालन एडवोकेट गोविंद बल्लभ उपाध्याय ने किया।
यहां बार के जिलाध्यक्ष विनोद भट्ट, दिवाकर वर्मा, ताईक्वांडो कोच कमलेश तिवारी, अनीता पांडे, प्रभारी प्रधानाचार्य हीरा, हेमती मेहता, मीना टम्टा, ममता धपोला, गंगा किरमोलिया, ज्योति कांडपाला, लक्ष्मी पांडे, द्रोपदी पांडे, सविता नगरकोटी, षष्टी कांडपाल और अशोक भंडारी आदि थे।