चीन में पढ़ाकर स्वदेश लौटे बागेश्वर निवासी मेरठ विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन
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बागेश्वर। दुग नाकुरी तहसील क्षेत्र के ग्राम पचार निवासी प्रो. नवीन चंद्र लोहनी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के हिंदी के विभागाध्यक्ष हैं। उन्होंने चीन के शंघाई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय में ढाई साल तक विजिटिंग प्रोफेसर के पद पर रहकर हिंदी का प्रचार, प्रसार किया।
स्वदेश लौटे लोहनी ने रविवार को टीआरसी में पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने चीन में बिताए ढाई साल के अपने अनुभव साझा किए। बताया कि चीन ने मंदारिन को विज्ञान और तकनीक की भाषा बनाया है। इसके माध्यम से रोजगार और कारोबार बढ़ाया है। अब वह हिंदी आदि विदेशी भाषाओं के माध्यम से भी ऐसा ही कर रहा है। भारत को भी ऐसा करना चाहिए।
प्रेसवार्ता में प्रो. लोहनी ने चीन में हिंदी के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने चीन में हिंदी के साथ संस्कृत भी पढ़ाई। चीन और भारत के सांस्कृतिक संबंधों में प्रगति और विकास के लिए काम किया। वहां के रेडियो और टेलीविजन पर भी हिंदी वार्ता की। उन्होंने चीन में समन्वय हिंची नाम से पहली छमाही हिंदी पत्रिका का प्रकाशन किया। यह हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर छपेगी। बताया कि चीन में 50 शिक्षक 400 से अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा में हिंदी पढ़ा रहे हैं। इसके लिए प्रवेश परीक्षा होती है, उसमें 90 प्रतिशत से अधिक प्राप्तांक वाले विद्यार्थी ही हिंदी पाठ्यक्रम में प्रवेश ले पाते हैं।
कई लोग हिंदी के माध्यम से अनुवादक, पत्रकार, दुभाषिया, कारोबारी, व्यवसायी के रूप में रोजगार कर रहे हैं। इसी कारण चीन में 15 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि वहां के लोग गूगल के बजाय चीन के सॉफ्टवेयर वीचैट के माध्यम से सब काम करते हैं। बताया कि डोकलाम विवाद के दौरान भी वह चीन में ही थे। उस दौरान भी वहां के लोगों में भारतीयों के प्रति कोई मतभेद नहीं दिखा। बौद्ध धर्मावलंबी होने के कारण भी वहां के अधिकतर लोग हिंदी समेत संस्कृत, पाली भाषा सीखने को उत्सुक रहते हैं।