कठायतबाड़ा क्षेत्र में बंदरों ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। बंदर न केवल लोगों के घरों में घुस रहे हैं बल्कि लोगों के हाथों से सामान तक छीनकर ले जा रहे हैं। इसके चलते लोग भयभीत हैैं।
हालात यह हैं कि बच्चों और महिलाओं का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। खेती से लेकर घर का सामान भी सुरक्षित नहीं है। परेशान नगरवासियों ने प्रशासन और वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
रीता देवी ने बताया कि बंदर, स्कूल जाने वाले बच्चों और अकेले लोगों पर हमला कर रहे हैं। बंदरों के डर से बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पिछले एक साल से बंदरों की तादात बहुत बढ़ गई है। घरों के बाहर सामान तक सुरक्षित नहीं रह पा रहा है।
गंगा देवी बुजुर्ग महिला ने बताया कि कठायतबाड़ा में सुबह से शाम तक बंदरों का ही आतंक रहता है। खेती और घर में रखे सामान को नुकसान पहुंचाने के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है। बंदर भगाने पर काटने को आते हैं। बंदरों से बच्चों की सुरक्षा करनी पड़ रही है।
दया भैंसोड़ा का कहना है कि बंदरों के कारण बाजार से सब्जी घर पहुंचाना तक चुनौती बनता जा रहा है। बंदर हाथ से सब्जी के थैले छीन लेते हैं।
बंदरों के डर से टोलियों में आवाजाही करनी पड़ती है। ऐसा कब तक चलेगा। सरकार को बंदरों की समस्या से निजात दिलानी चाहिए।
गीता मेहता का कहना है कि पहले उनके खेतों और बाड़ों में सब्जियों का उत्पादन होता था। परंतु बंदर अब सबकुछ तहस-नहस कर रहे हैं।
लगातार नुकसान के कारण उन्होंने सब्जी उगानी बंद कर दी है। सभी ग्रामीण परेशान हैं। सरकार को शीघ्र बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
राधा देवी का कहना है कि बंदर खेतों और बाड़ों में ही नहीं बल्कि पॉलीहाउसों को नुकसान पहुंचाकर उनमें उगाई सब्जियों को भी बर्बाद कर रहे हैं। सरकार को ग्रामीणों की समस्याओं पर विचार करना चाहिए।बंदरों के कारण लोग परेशान हैं।