गरुड़ (बागेश्वर)। भकुनखोला के खेल मैदान में आयोजित कत्यूर महोत्सव में रंगारंग कार्यक्रमाें की धूम है। बड़ी संख्या में नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं। खराब मौसम के बावजूद लोगों में खूब उत्साह है। रात को क्षेत्रवासी फिल्मी गीतों पर झूमे तो दिन के समय विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोहा।
शुक्रवार की रात को आयोजित पहली स्टार नाइट में अलंकार ग्रुप दिल्ली से आए गायकों ने फिल्मी गीतों की महफिल सजाई। गायक प्रदीप गुरुरानी, सुमित, विनीत और विपिन ने नए-पुराने गीतों से लोगों का मनोरंजन किया। तेरे जैसा यार कहां, कहां ऐसा याराना गीत का दर्शकों ने खूब लुत्फ उठाया। इस दौरान पंडाल में बैठे सभी दर्शक झूम रहे थे। शनिवार को दोपहर का समय विद्यालयाें के सांस्कृतिक कार्यक्रमाें के लिए नियत था। नगर और ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों से आए छात्र-छात्राओं ने कुमाउनी, गढ़वाली, हिंदी गीतों पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर मन मोहा। नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्थानीय प्रतिभाओं को भी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है। स्टार नाइट कार्यक्रम का लोग खूब लुत्फ उठा रहे हैं। इस दौरान पीएमजीएसवाई अनुश्रवण के शिव सिंह बिष्ट, ब्लाक प्रमुख किशन बोरा, जिपंस जनार्दन लोहुमी, देवेंद्र गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
लोगों का खूब भाया, मां-बेटी का गाया द्वि दिना का ड्यार शेरूवा
सांस्कृतिक मंच से मां और बेटी की जुगलबंदी में गाया गीत द्वि दिना का ड्यार शेरूवा यौ दुनी में लोगों को खूब पसंद आया। तिलस्यारी निवासी जानकी पिरसाली और उनकी बेटी कविता पिरसाली ने सुरों का ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक पंडाल में बैठे लोगों को अजय-दीवान की जोड़ी याद आ गई। कुछ लोग दीवान कनवाल को याद करते भी दिखे।
बारिश के दौरान भी मेला घूमते रहे लोग
गरुड़। सुबह से मौसम खराब होने के बावजूद मेला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। महोत्सव स्थल पर लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ वॉलीबाल का आनंद लेते दिखे। झूले-चरखे पर बैठने के अलावा लोगों ने पहली बार महोत्सव में आए ऊंट की सवारी भी की। मेला स्थल पर लगी दुकानों से भी लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
दीयों की रोशनी से जगमग हुआ धाम
कत्यूर महोत्सव की पहली शाम प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर में वन विभाग की ओर से नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा आरती और दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। दीपदान के दौरान गोमती नदी तट से लेकर बैजनाथ मंदिर तक दीयों की रोशनी से जगमग रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में भागीदारी की।
अहा कहां गेई ऊ पुराण दिन
गरुड़। कत्यूर महोत्सव में काव्य सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। क्षेत्र के कवियों ने हास्य, विरह, श्रृंगार और वीर रस की कविताएं पढ़ी। साहित्यकार मोहन चन्द्र जोशी, डॉ. प्रीतम सिंह नेगी, डॉ हेम चंद्र दुबे, मनोज खोलिया, चंद्रशेखर बड़सीला, प्रेमा भट्ट, आशा बुटोला, सुरेंद्र वर्मा, ओम प्रकाश फ़ुलारा, जीवन दोसाद आदि ने अपनी कविताओं के माध्यम से जीवन और समाज के कई रंग बिखेरे। हास्य रंग से सजी अहा कहां गेई ऊ पुराण दिन कविता को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला।