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कपकोट-कर्मी सड़क : कहीं गड्ढों की भरमार तो कहीं ढूंढने से नहीं मिलता डामर

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बागेश्वर। मानसूनी बारिश का दौर जाते-जाते जिले में जगह-जगह आपदा के जख्म छोड़ गया है। कपकोट-कर्मी सड़क पर भी कई जगहों पर भूस्खलन, भू धंसाव और गड्ढों के कारण सफर करना जोखिम बना हुआ है। इस सड़क पर कहीं गड्ढों की भरमार है तो कर्मी से आगे सड़क पर तलाशने के बाद भी डामर नहीं दिखता है। ऐसे में यात्रियों को खतरा उठाकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
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कपकोट से कर्मी तक की दूरी 24 किमी है। शुरूआत में सड़क ठीक है, लेकिन आगे जाते ही किनारे पर उगी झाड़ियां परेशानी बढ़ाती हैं। गांसू के समीप सड़क पर पहाड़ी से हर साल मानसून में भूस्खलन होता है। यह पूरी पहाड़ी ही खतरा बनी है। इससे आगे भी कहीं सड़क की नीचे की दीवार क्षतिग्रस्त है तो कहीं पहाड़ी से होता भूस्खलन खतरा बना रहता है। सापुली के समीप एक जगह रोड पर दरारें पड़ रही हैं और सड़क के नीचे का हिस्सा खोखला होता जा रहा है। सापुली तोक को जाने वाले रास्ते के समीप से हो रहा भूस्खलन का मलबा लगातार सड़क पर गिर रहा है। आगे कर्मी तक भी सड़क पर कई गड्ढे बने हुए हैं।


कर्मी से आगे ढूंढने से नहीं मिलता है डामर
कपकोट। कर्मी से विनायक धार तक सड़क अधिक बदहाल है। करीब आठ किमी की दूरी में सड़क पर डामर ढूंढना पड़ता है। कई जगहों पर सड़क की हालत नाले के समान हो गई है। कर्मी-तोली और टानी के समीप दशा अधिक खराब है। कहीं काॅजवे से सरिया बाहर झांक रहे हैं तो कहीं निकास नाली नहीं होने से पानी सड़क पर बह रहा है। अधिकांश जगहों पर सुरक्षा दीवारों के क्षतिग्रस्त होने से सड़क बेहद संकरी हो गई है। लोग जोखिम उठाकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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कोट
कपकोट-कर्मी सड़क दिसंबर में पीएमजीएसवाई से लोनिवि को हस्तांतरित हुई है। कपकोट से विनायक धार तक सड़क के सुधारीकरण और डामरीकरण के लिए 32 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। बजट मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा।
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अमित पटेल, ईई लोनिवि, बागेश्वर

फोटो 26 बीजीएस 03 से 06 पी
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