बागेश्वर। जिले में जंगलों पर फायर सीजन की अपेक्षा शीतकाल के दो महीने भारी पड़ रहे हैं। यहां अक्तूबर और नवंबर में जंगल में आग लगने की करीब 25 घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में 44.47 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जबकि फायर सीजन में हुई चार घटनाओं में मात्र 5.25 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आए थे।
ठंड के मौसम में भी जंगल लगातार आग की चपेट आ रहे हैं। अक्तूबर और नवंबर में जिला मुख्यालय के पास कुकुड़ामाई मंदिर, चंडिका पहाड़ी, कठायतबाड़ा के जंगल, भुरचुनिया धार, काफलीगैर के जंगल, छतीना, जौलकांडे, मनकोट, कांडा, दुगनाकुरी, कठपुड़ियाछीना, चिरपतकोट, पंद्रहपाली, गरुड़, बैजनाथ, गढ़खेत के जंगल जले हैं। आग से वन विभाग को करीब डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हो गया है। वन विभाग के अनुसार जंगल में आग लगने से 44.47 हेक्टेयर में वन्य संपदा आग की चपेट में आई है। शीतकाल में आग लगने से वन विभाग को काबू पाने में परेशानी हो रही है। वन्य जीवों को भी इससे नुकसान हो रहा है।
ठंड के सीजन में जंगलों में आग लगना चिंताजनक
बागेश्वर। पर्यावरणविद पूरन सिंह रावल ने ठंड के सीजन में लगातार हो रही आग की घटनाओं पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वन विभाग को आग की घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। वनाग्नि से वनसंपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। जंगली जानवरों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
कोट
लॉकडाउन के चलते लोगों का घरों में रहने से भी फायर सीजन में आग की घटनाएं कम हुई। वर्तमान में अधिकांश वनाग्नि की घटनाएं अराजक तत्वों की ओर जंगलों आग लगाने से हो रही हैं। आग की घटनाओं पर निगरानी रखी जा रही है। जंगल में आग लगाते हुए किसी व्यक्ति के पकड़े जाने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बीएस शाही डीएफओ बागेश्वर