बागेश्वर के जिला अस्पताल में स्थित जन औषधि केंद्र। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। जिला अस्पताल में बने प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के ताले दस माह बाद खुल तो गए लेकिन दवाओं का टोटा चल रहा है। सामान्य रोगों के उपचार के लिए भी लोगों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। जन औषधि केंद्र के खुलने का अभी कोई फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है। लोगों को मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही है। जन औषधि केंद्र में सर्दी, जुकाम, बुखार, बीपी, शुगर, विटामिन की दवाओं के अलावा पानी की बोतल व मास्क के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा है।
बागेश्वर के लोगों को सस्ते दामों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पांच जनवरी 2019 को जिला अस्पताल परिसर जन औषधि केंद्र खोला गया था। पांच सितंबर 2019 को जन औषधि केंद्र से आखिरी बार दवा बेची गई। छह सितंबर से औषधि केंद्र पूरे दस माह तक बंद रहा। 27 फरवरी के अंक में अमर उजाला ने इस पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। डीएम रंजना राजगुरु के हस्तेक्षप के बाद इसी महीने छह जुलाई को जन औषधि केंद्र को खोला गया। जिला रेडक्रॉस सोसायटी इसका संचालन कर रही है। जन औषधि केंद्र को दोबारा खुले 19 दिन हो गए हैं लेकिन अभी भी यहां से लोगों को जरूरत के हिसाब से दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल इलाज को आ रहे लोगों का कहना है कि उन्हें बाहर से महंगे दामों पर दवाएं लेनी पड़ रही है। अगर दवाएं नहीं मिलेंगी तो इसे खोलने का क्या फायदा है?
लोगों को सस्ती दवाओं का इंतजार
बागेश्वर। कोरोना काल में भी लोग सस्ती दवाओं के लिए इंतजार कर हैं लेकिन फिलहाल ये इंतजार खत्म होता नहीं नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में जेनेरिक दवाएं बाजार के मुकाबले 60 से 70 फीसदी कम दरों पर उपलब्ध हो जाती हैं, जो कि गरीब लोगों के लिए फायदेमंद साबित होती हैं। जन औषधि केंद्र का संचालन कर रहे जिला रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष अशोक लोहिनी ने बताया कि दवाओं के लिए आर्डर किया गया है। इस सप्ताह दवाएं केंद्र में पहुंच जाएंगी।
जन औषधि केंद्र में सभी प्रकार की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। डॉक्टर मरीजों के उपचार के लिए जो भी दवाएं लिखते हैं वह जन औषधि केंद्र में उपलब्ध होनी चाहिए। जिससे की लोगों को बाहर से दवाएं नहीं खरीदनी पड़े। - डॉ. बीडी जोशी मुख्य चिकित्साधिकारी बागेश्वर