70 कांवड़ियों के दल ने कपकोट से बागेश्वर तक 55 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद बागनाथ का जलाभिषेक किया। इसके बाद कांवड़ियों का यह दल संगम का जल लेकर वापस कपकोट रवाना हो गया। इससे पहले श्रद्धालुओं ने कपकोट से लेकर बागेश्वर तक कांवड़ियों के दल का जगह-जगह जोरदार स्वागत किया।
सोमवार को सरमूल, सौधारा, भद्रतुंग विकास समिति के तत्वावधान में 70 कांवड़ियों के दल ने कपकोट से लेकर बागेश्वर तक गाजेबाजे के साथ पदयात्रा की। कांवड़ियों के दल में बच्चे, व्यस्क से लेकर वृद्ध तक शामिल थे। पदयात्रा और जलाभिषेक को लेकर बच्चों से लेकर वृद्धों में बराबर उत्साह नजर आया। कांवड़ियों के दल में सबसे अधिक उम्र के 70 वर्षीय सोबन सिंह और माधो सिंह जबकि सबसे कम 13 साल के पूरन सिंह शामिल थे। दल का कपकोट से लेकर बागेश्वर तक असों, हरसीला, आरे आदि स्थानों पर जगह-जगह स्वागत किया गया।
बागेश्वर पहुंचने के बाद कांवड़ियों के दल ने बागनाथ का जलाथिषेक किया। इस दौरान हर हर महादेव उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। दोपहर बाद संगम का जल लेकर कांवड़ियों का दल वापस लौट गया। दल में नेतृत्वकर्ता भगवत कोरंगा, कमला कुमल्टा, महंत देवानंद महाराज, सुरेश गढ़िया, दयाल कुमल्टा, गोविंद टाकुली, भीम सिंह, सुुभाष चौबे, गंगा कोरंगा, गोकुुलानंद पाठक, भगवती कोरंगा, बलवीर कपकोटी, लछम सिंह, राधा देवी, रमेश भट्ट, आनंद सिंह, जीवन गिरी आदि थे।
सावन के सोमवार पर बागनाथ में श्रद्धालुओं का तांता
बागेश्वर। सावन के सोमवार पर बागनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नदियों के उफान पर रहने के बाद भी सैकड़ों ने संगम पर स्नान किया। मंदिर में दिनभर पूजा अर्चना और जलाभिषेक चलता रहा। सावन के तीसरे सोमवार को सुबह पांच बजे सेक ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता जुटना शुरू हो गया था। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान के साथ ही बागनाथ पर जलाभिषेक किया। मंदिर में दिनभर घंटे घड़ियाल और मंत्रोच्चार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के उद्घोष से वातावरण गूूंज उठा। इधर, कांडा के गोपेश्वर महादेव में भी दिनभर जलाभिषेक और पूजा करने वाले श्रद्धालुुओं का तांता लगा रहा। ब्यूरो