कपकोट (बागेश्वर)। ग्राम पंचायत कपकोट की सुरम्य पहाड़ी पर मां नंदा के धर्म भाई श्री श्री 1008 लाटू देवता का भव्य मंदिर है। इस मंदिर से क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था है। लाटू देवता को फसलों को ओलावृष्टि से रक्षा करने की सिद्धि प्राप्त है। मंदिर में हर साल 14 अप्रैल का सुप्रसिद्ध स्याल्दे बिखौती का मेला लगता है। जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। ग्राम पंचायत कपकोट की पहाड़ी पर स्थित श्री श्री 1008 लाटू देवता का मंदिर पहले बहुत छोटा था। वर्ष 2008-09 में क्षेत्र के लोगों के सहयोग से मंदिर भव्य बन गया है। ग्रामीण बताते हैं कि यहां लाटू देवता की स्थापना सदियों पहले राजा रत कपकोटी ने की थी।
मंदिर के लिए उपाध्याय पुजारी नियुक्त हैं जबकि पूजा पाठ जोशी लोग कराते हैं। लाटू देवता फसलों को ओलावृष्टि से बचाते हैं। मंदिर में हर साल बैशाख दो गते को क्षेत्र का सुप्रसिद्ध स्याल्दे बिखौती का मेला लगता है। इस दिन मंदिर में दिनभर पूजा, अर्चना के साथ भंडारा होता है। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ग्रामीण लाटू देवता को नए अनाज से बना प्रसाद चढ़ाते हैं। मंदिर में लोग अपनी मनौती पूरी होने पर सत्यनारायण भगवान की कथा आदि पूजा, पाठ करते रहते हैं। लोग मनौती पूरी होने पर घंटियां, शंख, पूजा के काम आने वाली अन्य वस्तुएं अर्पित करते हैं।
पुजारी लीलाधर उपाध्याय और मोहन चंद्र उपाध्याय ने बताया कि लाटू देवता थोड़े में प्रसन्न होने वाले देेवता हैं। मंदिर में नागों को दूध पिलाने के लिए घड़े में दूध डाला जाता है। नाग देवता मौका पाते ही दूध पी लेते हैं। मंदिर से नगर पंचायत क्षेत्र, मल्ला दानपुर, चिरपतकोट की मनोरम पहाड़ी दृष्टिगोचर होती है। लोगों का कहना है कि इस स्थल का पर्यटन की दृष्टि से विकास हो तो मंदिर में श्रद्धालुओं का आना जाना बढ़ सकता है। इससे बेरोजगारों को रोजगार भी मिल सकता है।