विकास के तमाम दावों के बावजूद राजकीय महाविद्यालय के भवनों का निर्माण 11 बरस बाद भी नहीं हो सका है। कक्षाएं आज भी जनता इंटर कालेज असों में चल रही हैं। एमए में मंजूर नए विषयों का भी संचालन शुरू नहीं हो सका है। महाविद्यालय में प्राचार्य, प्राध्यापक और लिपिक के पद भी खाली हैं। महाविद्यालय की समस्याओं का समाधान नहीं होने से छात्रों में रोष है।
मालूम हो कि राजकीय महाविद्यालय की स्थापना 2005 में हुई थी। भवनों का निर्माण नहीं होने से कक्षाएं इंटर कालेज असों के भवनों में चल रही हैं। महाविद्यालय में 267 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। कालेज का अपना भवन नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। महाविद्यालय में इस समय हिंदी, संस्कृत, गृह विज्ञान, चित्रकला, शिक्षा, राजनीति, समाज शास्त्र, ड्राइंग और पेंटिंग विषय संचालित हैं जबकि एमए में गृह विज्ञान, ड्राइंग एंड पेंटिंग विषय की अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है।
महाविद्यालय में प्राचार्य, प्राध्यापक और लिपिकों के पद भी रिक्त हैं। पुस्तकालय के लिए विधायक निधि से थोड़ी बहुत पुस्तकों की व्यवस्था की गई है। महाविद्यालय की समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई खासी प्रभावित हो रही है। प्रभारी प्राचार्य डा. केके पंत ने बताया कि एमए में स्वीकृत गृह विज्ञान, ड्राइंग एंड पेंटिंग विषयों का गत चार महीने पहले पैनल करा लिया गया है। उन्होंने कहा कि रूसा से प्राप्त 24 लाख रुपये से कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय भवन के पहले तल का निर्माण पूरा हो चुका है।
68 लाख रुपये की दूूसरी किश्त जारी हो चुकी है। कार्यदाई संस्था एनपीसीसीएल दूसरी किश्त से निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कर देगी। डा. पंत ने बताया कि महाविद्यालय भवन का निर्माण 1.66 हेक्टयेयर भूमि में होगा। इसके लिए वन अधिनियम की स्वीकृति मिल चुुकी है। शासन ने भवनों के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि निविदाएं आमंत्रित होने पर भवनों का निर्माण शुरू हो जाएगा।।