जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बृहस्पतिवार को इंटर कॉलेज चामी क्वैराली में कानूनी शिविर आयोजित किया गया। जिसमें प्राधिकरण के जिलाध्यक्ष और जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने कानूनी और मौलिक अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वह रटने की बजाय विषय को समझने की आदत डालें। रटने वाली विद्या अल्पकालीन होती है जबकि समझी गई विद्या स्थायी होती है। डॉ. शर्मा ने बच्चों से पढ़ने से बचने की मनोवृत्ति में बदलाव लाने को कहा।
बताया कि शिक्षा के अधिकार के तहत आठ से 14 वर्ष आयु के सभी बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के प्रावधान बताए। बाल श्रम विरोधी कानून बताए। कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को होटल, कारखाने में काम पर लगाने वाले मालिकों पर कानूनी कार्रवाई करें।
किशोर न्याय बोर्ड, बाल विवाह, लैंगिक अधिकारों से बच्चों का संरक्षण, बच्चों पर होने वाले घरेलू हिंसा, भेदभाव, लैंगिक भेदभाव न करने की जानकारी दी। प्राधिकरण की सचिव ज्योत्सना ने कहा कि सात वर्ष से कम उम्र के बच्चों की गलती अपराध नहीं मानी जाती।
इससे अधिक आयु के नाबालिग बच्चों से हुए अपराधों का विचारण किशोर न्याय बोर्ड करता है। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित, असुरक्षित स्पर्श को समझने, किसी विपरीत परिस्थिति का सामना करने पर फोन नंबर 1098 पर सूचना देने जैसे सुरक्षा के उपायों के बारे में बताया।
उन्होंने कोमल नामक एक बाल श्रमिक की फिल्म दिखाई। यहां जन शिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. जितेंद्र तिवारी, डीईओ माध्यमिक जगमोहन सोनी, पीवी सिंह, बीईओ डॉ. बृजेंद्र जोशी, नायब तहसीलदार बीएस कुमाल्टा, एसआई गोपाल राम, डॉ. रंजना साह, डॉ. शरद भट्ट, डॉ. धनंजय शर्मा, डॉ. दीपा कुमारी, प्रधानाचार्य केडी पांडे, कैलाश अंडोला आदि थे।