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काष्ठकला में महारथ हासिल है अमरगाड़ा के पुष्कर दा को

Wed, 17 Jan 2018 11:03 PM IST
गणेश उपाध्याय, बागेश्वर।
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पुष्कर राम।  - फोटो : अमर उजाला
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पिथौरागढ़ जिले के सुदूरवर्ती अमरगाड़ा गांव निवासी पुष्कर राम को काष्ठकला में महारथ हासिल है। वह जिस लकड़ी को छू लेते हैं, उसे तुरंत ही आकार मिल जाता है। उत्तरायणी मेले में लकड़ी से बनी उनकी कलाकृतियां और बर्तन मेलार्थियों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मेलार्थी कलाकृतियों का टकटकी लगाए अवलोकन कर रहे हैं। काष्ठकला में निपुण इस कलाकार को संरक्षण नहीं मिल पाने से वह आर्थिक कठिनाईयों से जूझ रहा है।

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बंगापानी तहसील के अमरगाड़ा गांव निवासी 46 वर्षीय पुष्कर राम को कला के प्रति बचपन से ही रुचि रही है। हाइस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने किसी कंपनी में नौकरी करने का मन बनाया। वर्ष 1988 में पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने यह निर्णय छोड़कर घर पर ही पैतृक कार्य काष्ठकला को अपना हुनर बनाने का संकल्प लिया और इसे नया रूप देने के लिए दिन रात मशक्कत करने लगे। अपनी हाड़तोड़ मेहनत से वह विभिन्न प्रजाति की लकड़ियों को आकार देने लगे।

उनकी मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें वर्ष 2016 में प्रदेश शासन ने उन्हें शिल्प रत्न से नवाजा तो सही, लेकिन उनकी माली हालत पर आज तक किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि कि लकड़ी तराशने के लिए उन्होंने सेरागाड़ में एक पनचक्की लगाई थी, जो वर्ष 2013 की आपदा की भेंट चढ़ गई। सरकार ने आज तक उसका मुआवजा तक नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि वह मेलों और अन्य समारोहों के मौके पर अपनी कलाकृतियों को लेकर जाते हैं, लेकिन इन्हें वहां ले जाने तक का भाड़ा भी नहीं निकल पाता है। वह कहते हैं यदि सरकार विपणन की ठोस व्यवस्था करे और उद्यमियों को मानदेय के रूप में हर महीने कुछ दे तो इससे जहां काष्ठकला संरक्षित होगी। वहीं भावी पीढ़ी का रुझान भी इस ओर बढ़ेगा।
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पुष्कर दा की तैयार काष्ठकलाकृतियां
लकड़ी के मंदिर, मशालादानी, कंघी, इमामदस्ता, गिलास, हुक्का, घी की हड़पी, श्रृंगारदान, ढोल, दमाऊ, डमरू, एश ट्रे, फूलदान, प्लेट आदि।

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