बागेश्वर। मालता गांव निवासी सेवानिवृत्त पोस्टमैन गुंसाई सिंह कनवाल में 65 साल की आयु में भी युवाओं जैसी ऊर्जा है। वह संचार क्रांति के बढ़ते कदम को बेहतर मानते हैं। कृषि, बागवानी और पशुपालन से शुरू से जुड़े रहे कनवाल ने अब मौन पालन का काम शुरू कर दिया है। वह लोगों को शहद पूजा और दवा के लिए मुफ्त में देते हैं।
मालता गांव के पांच बार निर्विरोध ग्राम प्रधान रहे लाल सिंह कनवाल नौ नवंबर 1972 में डाक विभाग से जुड़ गए थे। चार सितंबर 2014 को सेवानिवृत्त हो गए। रोजाना ड्रेस में रसमय से डाक बांटना उनकी खास खूूूबी थी। तब वह सुबह पांच बजे पैदल ही चीड़ के छिलके जलाकर अपने खेतों के उत्पादित चीजों को सिर में रखकर बागेश्वर ले लाते और उसे व्यापारियों को सौंपकर वह समय से डाक सेवा में जुट जाते। उनकी कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए 2002 में गणतंत्र दिवस समारोह में आयोजन समिति, 26 जनवरी 2004 को पोस्टमास्टर जनरल देहरादून, वर्ष 2004 में तत्कालीन एसपी द्वारा सम्मानित किया गया।
इसके अलावा 2012 में डाक अधीक्षक अल्मोड़ा और तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट सीनियर डिवीजन की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कनवाल कहते हैं कि पहले आज की तरह नेट, मोबाइल फोन और कोरियर सेवा नहीं थी। तब हाथ से लिखी चिट्ठियां, पार्सल और मनीआर्डर काफी होते थे। जिनके पहुंचने का लोग बेसब्री से इंतजार करते थे। अब यह काम कुछ कम तो हुए हैं लेकिन अन्य काम बढ़ गए हैं। पहले की अपेक्षा अब बहुत कम पोस्टमैन ड्रेस में दिखाई देते हैं।