बागेश्वर। 1997 में अल्मोड़ा से अलग होकर बागेश्वर नया जिला बना था। नया जिला बनने के बाद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी की उम्मीद थी लेकिन तब से अब तक हालात में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। आज भी जिला अस्पताल सुविधाओं से वंचित है। अस्पताल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की जांच तक ही सीमित रह गया है। सीटी स्कैन के लिए अब भी लोगों को हल्द्वानी और अन्य शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है।
जिले की आबादी करीब पौने तीन लाख है। जनसंख्या में इजाफा होता गया लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ीं। आज भी जिले के लोगों के पास स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर एकमात्र जिला अस्पताल है। जहां कभी डॉक्टरों की कमी तो कभी संसाधनों का अभाव, कभी विशेषज्ञों की कमी तो कभी सुविधाओं का रोना रहता है। अस्पताल आने वाले अधिकांश मरीजों को आज भी हल्द्वानी, बरेली या दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन स्थापित न होने का मुख्य कारण यहां पर रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। जिले में तीन अस्पतालों में दो ही रेडियोलॉजिस्ट हैं। सीटी स्कैन के लिए विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत होगी। सीटी स्कैन की मशीनें काफी महंगी हैं। मशीनों को लगाने के लिए भवन की भी जरूरत है।
सीटी स्कैन की मशीनों को लगाने के लिए भवन की मरम्मत होनी है। जिसके लिए 38 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। शासन से स्वीकृत होने के बाद भी भवन बनाया जाएगा। भवन तैयार होने पर ही मशीनों की क्रय का प्रस्ताव बनाया जाएगा।
- डॉ. बीडी जोशी, मुख्य चिकित्साधिकारी, बागेश्वर।