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काश, गांव से पिंजड़ा नहीं हटाते तो टल सकती थी घटना 

Thu, 08 Nov 2018 10:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
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द्यांगण गांव में मृतक मासूम के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
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काश वन विभाग ने द्यांगण गांव में लगाया गया पिंजड़ा नहीं हटाया होता तो इस गांव में मंगलवार को गुलदार द्वारा मासूम को निवाला बनाने की घटना नहीं होती। लेकिन विभाग की लापरवाही और जल्दबाजी एक और मासूम की मौत का सबब बन गई। दरअसल विभाग ने कुछ समय पहले ही गांव में लगाया गया पिंजड़ा हटा लिया था। जबकि ग्रामीण लगातार तेंदुए के देखे जाने और पकड़ने की मांग कर रहे थे। इसके बावजूद विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के बजाय पिंजड़ा तक हटा दिया। इस जानलेवा लापरवाही पर महकमे के अधिकारी चुप्पी साधे हैं। 
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नगर से सटे द्यांगण गांव में लंबे समय से तेंदुआ ट्रैस हो रहा है। हाल ही में मारा गया तेंदुआ भी गांव के आसपास ट्रैस हुआ था। तेंदुए के मूवमेंट को देखते हुए विभाग ने गांव की सीमा पर पिंजड़े लगाए थे। कुछ दिनों तक पिंजड़ा लगाने के बाद एक माह पूूर्व हटा दिया गया। जबकि इसके बाद भी ग्रामीणों ने तेंदुए की आवाजाही की शिकायत की थी। आखिरकार ग्रामीणों की आशंका सही साबित हुई। 

आदमखोर ने कुछ समय की चुप्पी के बाद एक और मासूम को निशाना बना लिया। इसे लेकर विभाग की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग ने पिंजड़ा हटाने में जल्दबाजी नहीं की होती तो शायद यह घटना टल सकती थी। इस मामले मेें डीएफओ आरके सिंह का कहना है कि तेंदुए उस स्थान पर पकड़ में नहीं आ रहा था, तो दूसरी जगह पिंजड़ा लगा दिया गया। 
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सर्वदलीय संघर्ष समिति 15 को तहसील में करेगी प्रदर्शन
गरुड़ (बागेश्वर)।  सर्वदलीय संघर्ष समिति ने तेंदुओं को ड्रोन कैमरे से चिह्नित करने और सालमगड़ के जंगल में छिपे आदमखोर तेंदुए को मारने की मांग को लेकर पंद्रह नवंबर को तहसील मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन करेगी।
 विकास खंड के बैजनाथ और गढ़खेत रेंज के अधिकांश गांवों में तेंदुए की दहशत से लोग परेशान हैं। तेंदुए शाम होते ही आबादी में गरजना शुुुरू कर देते है। हालांकि ग्रामीण तेंदुओं को आबादी से भगाने के लिए शाम होते ही अपने घरों के आसपास कनस्तर बजाना शुरू कर देते हैं। सर्वदलीय संघर्ष समिति के भुवन पाठक, जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र मेेहता, हरीनगरी के प्रधान लक्ष्मण राम, भूपाल गढ़िया, त्रिलोक बुटोला ने बताया कि सालमगढ़ में आदमखोर तेंदुए ने तीन माह पूर्व एक मासूम बच्ची निवाला बनाया था। शिकारी लखपत सिंह भी इस आदमखोर तेंदुए को मारने में असफल साबित हुए है। तेंदुआ इस बीच आए दिन आबादी में आए दिन दिख रहा है। सर्वदलीय संघर्ष समिति  ने डीएम को भेजे ज्ञापन में कहा है कि समय रहते वन विभाग गढखेत और बैजनाथ रेंज के जंगलों में छिपे तेंदुओं को चिह्नित करने के लिए जंगलों में ड्रोन कैमरा नहीं लगाया तो समिति पंद्रह नवंबर को तहसील मुख्यालय में प्रदर्शन करेगी। ब्यूरो
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