बागेश्वर के जिला अस्पताल में उमड़ी मरीजों की भीड़। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच भी जिला अस्पताल बागेश्वर में परिवेश से पहले न लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है और न ही सैनिटाइजेशन के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था है। अस्पताल में लगाई गई सैनिटाइजिंग मशीन भी कभी चलती है, कभी बंद रहती है। यहां तक कि अस्पताल के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग भी देखने को नहीं मिल रही है। ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि इन हालातों में जिला कोरोना मुक्त कैसे हो सकता है।
जिला चिकित्सालय में परिवेश के लिए दो द्वार हैं। इनमें से एक भी गेट पर न थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है और न ही अस्पताल के अंदर जाने से पहले लोगों के हाथों को सैनिटाइज किया जा रहा है। लोगों को कहना है कि अस्पताल में परिवेश से पहले स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन नहीं किया जा रहा है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। अस्पताल में रोजाना सैंकड़ों की संख्या में लोग इजाज को आते हैं।
मंगलवार को अस्पताल में 400 लोगों की भीड़ रही लेकिन न तो इनकी स्क्रीनिंग की गई और न ही सैनिटाइज किया गया। स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन को कोरोना वायरस से बचाव के लिए कारगर माना गया है। बाहरी प्रदेशों से लौटे प्रवासी भी अस्पताल में इलाज को आते हैं। हाल ही में गरुड़ क्षेत्र में एक व्यक्ति से 30 लोगों को कोरोना फैला है। ऐसे हालातों में अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है।
अस्पताल के भीतर सैनिटाइजर मशीन लगाई गई है। अस्पताल में परिवेश से पहले सब लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग संभव नहीं है। पीआरडी जवान मिल जाएं तो इसके लिए प्रयास किया जाएगा। - डॉ. ललित सिंह टोलिया, सीएमएस जिला अस्पताल बागेश्वर।