बागेश्वर (दीप सिंह नेगी)। एक अप्रैल से प्राथमिक विद्यालयों के संचालन की संभावना है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम पांच शिक्षकों की तैनाती का एलान किया है। सूबे के मुखिया के इस एलान को पूरा करने के लिए सरकार को न केवल ऐड़ी चोटी का जोर लगाना होगा, बल्कि शिक्षकों के रिक्त पदों पर बंपर भर्ती भी करनी होगी। अकेले बागेश्वर जिले में प्राथमिक शिक्षकों के 348 पद रिक्त हैं। इन हालात में सरकार कैसे एक स्कूल में पांच शिक्षक देती है, यह देखने वाली बात होगी।
एक अप्रैल से प्राथमिक विद्यालयों के संचालन की संभावना है। जिले में 563 सरकारी प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें 10765 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यालयों के लिए 1194 शिक्षकों के पद सृजित किए गए हैं लेकिन 846 पदों पर ही शिक्षक तैनात हैं। 348 शिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं। जिले में 26 स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षक उपलब्ध नहीं है। इन स्कूलों में व्यवस्था के माध्यम से शिक्षण का कार्य चलाया जा रहा है। 140 स्कूल ऐसे हैं, जहां दस से कम छात्र संख्या रह गई है। वहीं 13 स्कूल ऐसे हैं, जो कि एक या दो बच्चों के सहारे चल रहे हैं। 16 स्कूल आरटीई के दायरे में नहीं होने के कारण बंद कर दिए गए हैं। पर्याप्त शिक्षक न होने से छात्र संख्या घट रही है और स्कूल बंद हो रहे हैं। 2006 से अब तक कम छात्र संख्या के चलते 31 प्राथमिक स्कूल बंद हो चुके हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं। मध्यम वर्ग और उससे नीचे तबके के बच्चों की पढ़ाई सरकारी प्राथमिक विद्यालयों पर निर्भर रहती है। (संवाद)
इन विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं तैनात, व्यवस्था से हो रहे संचालित
प्राथमिक विद्यालय घिंघारूतोला, सिल्ली, बिनखोली, सौड़धार, घटकनेला, मल्ला ढुकरा, खोलीखेत, असों, हरसीला, कफलानी, खलपट्टा, नीड़नगेला, किलपारा, कुंवारी, समडर, कापड़ी, रंगदेव, बिलौना, बानरी, मनकोट, पंतक्वैराली, खांकर, छानी, देवलधार, आरे, डुंगरी।
जिले में 200 प्राथमिक शिक्षकों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। मई या जून में शिक्षकों की भर्ती हो जाएगी। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी। - पदमेंद्र सकलानी मुख्य शिक्षाधिकारी बागेश्वर