वन विभाग की योजनाओं के लिए सरकार की ओर से पैसा नहीं मिल रहा है। बगैर पैसे के सिविल सोयम वन प्रभाग में कई योजनाएं सालों से लंबित पड़ी हैं। इन योजनाओं में 5.40 करोड़ की लागत से बनने वाले मिनी जू, 1.50 करोड़ की लागत का बंदर बाड़ा समेत पशु जनहानि और जिला योजना समेत कई कार्य लंबित हैं। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि जगंल बचाने और पर्यावरण को संरक्षित करने की वन विभाग की कैंपा योजना में भी पैसा नहीं आया, जिससे इस साल पौधरोपण का कार्य ही नहीं हो सका।
वन विभाग को दो साल से अधिक समय से बजट नहीं मिलने से न तो नई योजनाएं आई हैं और न ही पुरानी योजनाओं के लिए पैसा जारी हुआ है। नगर के मृग विहार में 5.40 करोड़ की लागत से मिनी जू का निर्माण होना था, लेकिन बजट नहीं आने से काम रुका हुआ है। 1.50 करोड़ की लागत से बनने वाले बंदर बाड़ा के लिए भी धन आवंटित नहीं हुआ है। जिला योजना में 25 लाख का बजट रखा गया था, जिसमेें केवल पांच लाख ही आया। इस योजना के तहत वन विभाग को भवनों की मरम्मत, वन मार्ग आदि ठीक कराया जाता है।
2015-16 से वन विभाग को पशु जन हानि योजना के तहत 726 पशुओं की हानि और छह मानव घायल के लिए लगभग 90 लाख 57 हजार रुपये नहीं मिला है। पशु पालक हर बार की तरह विभाग से खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। हर साल वन विभाग को पौध रोपण के नाम पर भारी बजट मिलता था, लेकिन इस बार करीब एक करोड़ की कैंपा योजना में भी विभाग को ठेंगा ही हाथ लगा। हालांकि विभाग को बहुउद्देशीय पौध रोपण के तहत 56 हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए केवल करीब सात लाख रुपये मिले।
प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड को कई बार पत्र व्यवहार कर विभाग की परेशानी बता दी गई है। पैसा आने के बाद ही इन योजनाओं में काम शुरू हो सकेगा।
-आरसी शर्मा, डीएफओ, सिविल सोयम वन प्रभाग, अल्मोड़ा।