बागेश्वर। विजय दिवस पर वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में देश की आन-बान-शान के लिए कुर्बानी देने वाले बागेश्वर के 24 सूरमाओं को सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और समाजसेवियों ने श्रद्धांजलि दी। जिले में आठ शहीदों की वीरांगनाएं जीवित हैं। इनमें से कार्यक्रम में मौजूद चार वीरांगनाओं को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित कियसा गया।
सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय की ओर से शहीद स्मारक में आयोजित कार्यक्रम में एसडीएम योगेंद्र सिंह ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि तीन दिसंबर से 16 दिसंबर 1971 तक लड़े गए भारत-पाक युद्ध में भारतीय सैनिकों ने आदम्य साहस का परिचय देते विजय प्राप्त की। जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी लेफ्टीनेंट कर्नल गंगा सिंह बिष्ट ने 1971 भारत-पाक युद्ध के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि भारत ने अपने रण कौशल और वीर सैनिकों की बहादुरी की बदौलत इस युद्ध को मात्र 14 दिनों में समाप्त कर दिया। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को बंदी बनाया था। शिमला समझौते के तहत इन युद्ध बंदियों को रिहा किया गया।
एसडीएम ने विजय दिवस पर वीरांगना पानुली देवी पत्नी शहीद वीर चक्र खड़क सिंह, कलावती देवी पत्नी शहीद भैरव दत्त, दमयंति देवी पत्नी शहीद उमेद सिंह, विमला जोशी पत्नी शहीद केआर जोशी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में सहायक जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी आरसी तिवारी, नायब तहसीलदार दीपिका आर्या, पालिका के ईओ राजदेव जायसी, वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, वरिष्ठ नागरिक न्यास के अध्यक्ष रणजीत सिंह बोरा, इंद्र सिंह परिहार, दिलीप सिंह खेतवाल, नरेंद्र खेतवाल, चंदन नगरकोटी, चंदन ऐठानी आदि मौजूद थे।
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71 की लड़ाई में बागेश्वर के इन रणबांकुरों ने दी शहादत
वीर चक्र विजेता खड़क सिंह, भैरव दत्त, उमेद सिंह, केआर जोशी, मोहन राम, दीवान राम, लाल सिंह, जोगा सिंह, बाला दत्त, मोहन चंद्र, किशन सिंह, हर सिंह, गजे सिंह, करम सिंह, नारायण सिंह, मेहरबान सिंह, भीम सिंह, पुष्कर सिंह, भवानी राम, राम लाल, कुशी राम, तेज सिंह, नर सिंह, शेखर दत्त।
वीर माताएं बोलीं
उनके साथ काफी कम समय साथ बिताने का मौका मिला। वह काफी साहसी थे। उनकी शहादत पर फक्र होता है। - वीरांगना पानुली देवी धमपत्नी शहीद वीर चक्र खड़क सिंह निवासी सूपी
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उनकी शहादत के बाद हालात एकदम संभलने वाले नहीं थे। परिवार का सहारा मिला। उनकी वीरता पर गर्व होता है। - वीरांगना कलावती देवी धर्मपत्नी शहीद हवलदार भैरव दत्त निवासी महरूड़ी
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देश के लिए कुर्बान होना हर किसी बूते की बात नहीं है लेकिन परिवार पर संकट आ जाता है। उनकी हमेशा याद आती है। - वीरांगना दमयंती देवी धर्मपत्नी शहीद सिपाही उमेद सिंह निवासी सूपी
युद्धकाल की यादें आज भी ताजा हैं। भारतीय सेना का इतिहास गौरवशाली रहा है। उनकी शहादत पर आज भी गर्व होता है। - वीरांगना विमला जोशी धर्मपत्नी सेलर (नाविक) केआर जोशी निवासी बाड़ीखेत
16 बीजीएस 03पी से 06पी